उत्तर प्रदेष विकास की दौड़ में पीछे क्यो?
उ.प्र. भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला प्रदेष है। यह देष की 16.4 प्रतिषत आबादी रहती है। देष का 9 प्रतिषत भौगोलिक क्षेत्र जो लगभग 2,94,411 वर्ग किमी है। यदि यह 17.5 करोड़ की आबादी के साथ एक स्वतंत्र राज्य होता तो विष्व का छठवा बड़ा देष होता। प्राचीन काल में प्रदेष प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर सम्पन्न प्रदेष माना जाता था। परन्तु ब्रिटिष सामा्राज्यवाद की गलत नीतियों व आजादी के पष्चात सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण प्रदेष बइहाली की ओर अग्रसर होता गया। आजादी के 64 वर्षो के पष्चात प्रदेष गरीबी, बेरोजगारी, अषिक्षा से त्रस्त है, समाज में जातिवाद चरम पर है गुण्डागर्दी, भ्रष्टाचार, बीमारी लाचारी चारों ओर दिखाई देती है।
1. आजादी के पष्चात प्रथम पंचवर्षीयी योजना में देष में कृषि विकास उन्मुख नीतियां बनायी गयी जिसके अन्तर्गत बड़े-बड़े बांधों का निर्माण हुआ जिससे बिजली पैदा की जा सके और देष में सिचिंत क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। परन्तु प्रथम पंचवर्षीय योजना में उ.प्र. को कुछ नहीं मिला। द्वितीय पंचवर्षीय योजना में योजना आयोग ने औद्योगिक विकास का लक्ष्य रखा। यद्यपि तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू उ.प्र. की फूलपुर संसदीय सीट से सांसद थे फिर भी उत्तर प्रदेष विषेषकर पूर्वान्चल औद्योगिक विकास की दौड़ से बाहर ही रहा।
2. स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रथम दषक में देष में भूमि सुधार लाये गये, जिसका मुख्य उद्देष्य जमीदारी की व्यवस्था को समाप्त करना व वास्तविक जोतदारों को जमीन मुहैया कराना था। परन्तु दुर्भाग्यवष प्रदेष में भूमि सुधारों को लागू नहीं किया गया। 70 के दषक में देष में हरितक्रान्ति प्रारम्भ की गयी जिसका मुख्य उद्देष्य उच्च पैदावार वाले उन्नत किस्म के बीज, ;भ्ल्ट ैममकेद्ध फर्टिलाइजर, कीटनाषक का प्रयोग व सिंचित क्षेत्र में वृद्धि कर देष को खाद्याान्न के मामले में आत्म निर्भर बनाना था। परन्तु हरित क्रान्ति पंजाब, हरियाण व पष्चिमी उ.प्र. तक ही सीमित रही। भारत सरकार थोड़ा-थोड़ा सब जगह के स्थान पर सब कुछ एक जगह के सिद्धांत पर कार्य करती रही। यह दृष्टिकोण आज भी बदस्तूत जारी हैं। योजना आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 185 कल्याणकारी योजनाओं हेतु रूपया 10,000,000/ करोड़ का प्रावधान किया गया और इसमें से रूपया 6,91,000/ करोड़ मात्र 13 योजनाओं पर खर्च किया गया। अब भारत सरकार बारहवीं पंच वर्षीय योजना (2012-17) में अधिकांष कल्याणकारी योजनाओं को समाप्त कर कुछ योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विचार कर ही अर्थात देष के सबसे बड़े प्रदेष में चलने वाली अधिकांष योजनायें समाप्त हो सकती हंै।
3. वर्ष 2011-12 के बजट में भारत सरकार ने पूर्वी उ.प्र. व अन्य 7 राज्यों बिहार, असम, पष्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखण्ड में हरित क्रान्ति लाने हेतु 400 करोड़ रूपये का प्रावधान किया। जहां कामनवेल्थ खेलों के दौरान दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम को मरम्मत हेतु 970 करोड़ खर्च कर दिये गये वहीं 7 राज्यों में हरित क्रान्ति हेतु मात्र 400 करोड़ रूपये का प्रावधान बहुत ही हास्यास्पद लगता है।
उ. प्र. की बदहाली के लिये जहां सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति उत्तरदायी है, वहीं अन्य कारण भी इसके पिछड़ेपन के लिये उत्तरदायी हैं। भौगोलिक दृष्टि से उ.प्र. के विभिन्न भागों के विकास हेतु विभिन्न दृष्टिकोण और भिन्न प्रकार की योजनाओं की आवष्यकतायेंह ैं-
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