देवरिया · लखनऊ · जयपुर — अभिलेखागार 2012–2021

पड़ोसी देषों से भारत के संबंध

लेख · कलराज मिश्र · 2026

स्वतंत्रता प्राति के पष्चात से ही भारत की विदेष नीति पंचषील तटस्थता के सिद्धांत पर आधारित रही। पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल तक कितनी सरकारें आयीं, हमारी विदेष नीति सदा ही पंचषील के सिद्धांतों पर चली। यद्यपि हमारे पड़ोसी देषों ने कई बार भारत की सम्प्रभुता सहिष्णुता के साथ हस्तक्षेप का प्रयास किया। पाकिस्तान के साथ हम तीन युद्ध कर चुके हैं और अभी भी पाकिस्तान में प्रषिक्षित आतंकवादियों से देष को खतरा बना हुआ है।

अभी हम 26/11 की त्रासदी को भुला नहीं पाये हैं और हाल ही में अमेरिकी जांच एजेंसी एफआईबी ने खुलाषा किया है कि लष्कर-ए-तौबा ने डेविड हेडली और तहब्वुर राणा की मदद से सोमनाथ मंदिर, षिवसेना व कई फिल्मी सितारों को निषाना बनाने की साजिष की थी, यह रिपोर्ट निष्चित रूप से चिंताजनक है। यह सत्य है कि पाकिस्तान में प्रषिक्षण ले रहे आतंकवादियों का निषाना मात्र भारत की जनता है और भारत सरकार को इस विषय में कुछ कठोर कदम उठाने की आवष्यकता है। पाकिस्तान के नेताओं के परस्पर विरोधी बयान इस बात का संकेत देते हैं कि पाकिस्तान भारत के साथ मधुर रिष्ते बनाने में गंभीर नहीं है।

एक ओर हम पाकिस्तान की आंतकवादियों कार्यवाहियों से हम खतरा महसूस कर रहे हों दूसरी ओर बंगलादेषी षरणार्थियों की समस्या ने देष की आर्थिक स्थिति पर एक और बोझ डाल रखा है। तीन दषक का समय बीत जाने के पष्चात भी हम इस समस्या से निजात नहीं पा सके। बंगलादेषी षरणार्थियों की समस्या को निपटाने के लिये कुछ गंभीर कदम उठाने आवष्यक हैं।

भारतीय उपमहाद्वीप में ष्षान्ति व समृद्धि भारत की विदेष नीति का प्रमुख उद्देष्य रहा है। परन्तु दुर्भाग्यवष हमारे अन्य पड़ोसी देष ऐसा नहीं चाहते। श्रीलंका में लिट्टे की समस्या को कभी गंभीरता से हल करने का प्रयास नहीं हुआ। तमिल श्रीलंका की आबादी का एक अहं हिस्सा है और इस समस्या का उचित निदान किया गया होता तो हमारे पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या न होती, न जाने हमें दूसरांे की गलत नीतियों का परिणाम कब तक भुगतना होगा।

परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक लगाने के लिये गठित अन्र्तराष्ट्रीय आयोग ने दुनिया में 23 हजार से से अधिक एटमी बम हैं जो हिरोषिमा पर गिराये गये एटम बम से डेढ़ लाख गुणा ज्यादा हैं। यह बहुत चिंताजनक स्थिति है और इस विषय देष को यथोचित नीति निर्धारण की आवष्यकता है। भारत एनटीपी की संधि को मानता है और रिपोर्ट में भारत को पाकिस्तान और इजराइल के साथ रखना सरासर गलत है।

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