देवरिया · लखनऊ · जयपुर — अभिलेखागार 2012–2021

निःसंदेह श्री ठाकरे महाराष्ट्र के शेर थे

लेख · कलराज मिश्र · 2026

“स्वर्गीय श्री बाल ठाकरे आज हमारे बीच नहीं हैं, महाराष्ट्र या मैं कहूँ देश की राजनीति में उनकी कमी हमेशा खलेगी तो गलत नहीं होगा ।

श्री ठाकरे सिद्धांतों के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित थे और बड़ी निर्भीकता व तर्क के साथ अपनी बात बिना किसी आलोचना की परवाह करते हुए प्रभावी ढंग से रखते थे, कभी इस बात की चिंता नहीं करते थे की इसका क्या परिणाम होगा? यही उनके व्यक्तित्व की बहुत बड़ी विशेषता थी ।

महाराष्ट्र में उन्होंने हिंदुत्व वादी विचारधारा को बल दिया और विभिन्न हिन्दू धाराओं को जोड़ने का कार्य किया , इस विचारधारा को अस्तित्व में लाने के लिए सन 1966 में उन्होंने छत्रपति शिवाजी के आदर्शो से प्रभावित होकर शिव सेना जैसे संगठन का निर्माण किया, शिव सेना का गठन महाराष्ट्र में हिन्दू सामराज्य की स्थापना को पूर्ण रूपेण चरितार्थ करता है, या मैं अगर यह कहूँ की श्री ठाकरे महाराष्ट्र में हिन्दू के प्रणोता थे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

शिव सेना का, न केवल महाराष्ट्र अपितु भारतीय राजनीती में NDA को समर्थन देकर अटल जी की केंद्र में सरकार बनाने में भी बड़ा योगदान रहा है। इसी का परिणाम है की जो कुछ भी वो बोलते थे लोग उनकी बात को बड़ी गंभीरता से लिया करते थे ।

मुंबई के हर वर्ग के लोगों से चाहे वह सामान्य आदमी हो, समाज सेवी संगठन से जुड़ा हो, कारोबारी हो, फिल्म जगत से जुड़ा हो या किसी भी क्षेत्र का हों, वह उनके जानने वाले थे और उनका सम्मान करते थे कहने का तात्पर्य यह है की उनकी पकड़ समाज के सभी वर्गों में थी ।

उनके निधन के बाद जिस तरह से महाराष्ट्र की जनता ने अपना शोक प्रदर्शित किया वह वाकई अकल्पनीय और उदाहरण योग्य है , इतनी बड़ी शोक यात्रा भारतीय इतिहास में किसी भी राजनेता की नहीं हुई थी

एक वाकय में कहा जा सकता है की निः संदेह श्री ठाकरे महाराष्ट्र के शेर थे

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