देवरिया · लखनऊ · जयपुर — अभिलेखागार 2012–2021

रन फॉर यूनिटी: राष्ट्रीय एकता दिवस की परंपरा

देवरिया · कलराज मिश्र · 2026

जनवरी 2019 में देवरिया के भाटपार में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम में शामिल हुए तत्कालीन सांसद कलराज मिश्र। संग्रह के इस संदर्भ से यह लेख राष्ट्रीय एकता दिवस और एकता दौड़ की परंपरा पर है।

राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत

केंद्र सरकार ने 2014 में 31 अक्टूबर — सरदार पटेल की जयंती — को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' घोषित किया। उसी वर्ष से देशभर में 'रन फॉर यूनिटी' की परंपरा शुरू हुई: विद्यालय, पुलिस, एनसीसी और नगर निकाय एकता की दौड़ और शपथ के साथ इस दिन को मनाते हैं। सरदार पटेल — देश के पहले गृह मंत्री — को रियासतों के एकीकरण का शिल्पकार माना जाता है; 560 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय उनकी और वीपी मेनन की कूटनीति का परिणाम था।

दौड़ का प्रतीकात्मक व्याकरण

  • दौड़ में साथ दौड़ना — वर्ग, जाति, भाषा से ऊपर एक ही ट्रैक का संदेश
  • एकता की शपथ — 'राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा' के संकल्प का पाठ
  • विद्यालयों में पटेल के जीवन पर प्रवचन — नई पीढ़ी तक एकीकरण का इतिहास पहुंचाना

भाटपार जैसे छोटे केंद्रों में मतलब

बड़े शहरों में ऐसे कार्यक्रम स्टेडियम में होते हैं, पर कस्बों में ये मैदान और विद्यालय परिसर में होते हैं। भाटपार जैसे क्षेत्र में पुलिस चौकी, इंटर कॉलेज और ग्राम प्रधानों की मौजूदगी में निकली दौड़ कई गांवों के युवाओं को एक सुबह एक ही उद्देश्य में जोड़ देती है।

वर्षपड़ाव
2014राष्ट्रीय एकता दिवस की घोषणा; पहली रन फॉर यूनिटी
2018गुजरात के केवड़िया में 182 मीटर ऊंची 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण
2019–2025हर वर्ष 31 अक्टूबर को केंद्र और राज्य स्तर पर एकता दौड़ का निरंतर आयोजन

पटेल का असली सबक

पटेल की एकता की कला सिर्फ मानचित्र की नहीं, प्रशासन की थी — एकीकृत रियासतों को भारतीय सिविल सेवा के ढांचे में बांधना। देवरिया की 2019 वाली दौड़ उसी स्मरण का स्थानीय रूप थी। 2026 में भी 31 अक्टूबर को निकलने वाली हर एकता दौड़ यही पूछती है — विविधता में एकता कागज पर नहीं, दौड़ की रफ्तार में कैसे दिखती है।