देवरिया · लखनऊ · जयपुर — अभिलेखागार 2012–2021

तमकुहीराज के खुदुरा गांव में सड़क निर्माण कार्यों का शुभारंभ

देवरिया · कलराज मिश्र · 2026

मार्च 2019 में तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र के गांव खुदुरा में करीब छह करोड़ नब्बे लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्यों का शुभारंभ हुआ था। संग्रह की इस खबर के संदर्भ में यह लेख पूर्वांचल के सड़क संपर्क और छोटी लागत के बड़े असर पर है।

पूर्वांचल और सड़क का सवाल

देवरिया, कुशीनगर और गोरखपुर की ओर बढ़ता पूर्वांचल गंगा-घाघरा के मैदान में बसा है — यहां घनी आबादी, छोटी जोतें और मानसून में कटती पक्की सड़कें हैं। तमकुहीराज जैसा क्षेत्र कुशीनगर जिले का हिस्सा है, जहां हर सड़क प्रोजेक्ट का मतलब दर्जनों गांव की मंडी, विद्यालय और अस्पताल से जुड़ाव है।

छह-सात करोड़ का प्रोजेक्ट क्या बदलता है

  • 5–8 किलोमीटर की नई पक्की सड़क या मरम्मत — दो-तीन गांव के बीच सालोभर संपर्क
  • छोटे पुल और नाले — बरसात में कटने वाले रास्ते खुलते हैं
  • निर्माण काल में स्थानीय मजदूरी — मनरेगा से आगे का देहाती रोजगार
  • ट्रैक्टर-ट्राली और ई-रिक्शा की आवाजाही — खेत से मंडी की लागत घटती है

लागत कैसे तय होती है

सड़क की लागत में पीढ़ी सतह (सब-ग्रेड), जीएसबी और डामर/सीमेंट परत, पुल-नाले और सड़क किनारे की मिट्टी शामिल होती है। पूर्वांचल में मिट्टी की सतह नरम होने से आधार की लागत थोड़ी बढ़ जाती है। यही वजह है कि पीएमजीएसवाई की दरें राज्य के भूगोल के हिसाब से अलग-अलग तय होती हैं।

मदलागत में हिस्सा (सामान्यतः)
मिट्टी और सब-बेस का काम35–45%
डामर/सीमेंट सतह35–40%
पुल-नाले और जलनिकास10–15%
गुणवत्ता जांच और प्रशासन5–8%

खुदुरा के बाद

2019 के उस शुभारंभ के बाद पूर्वांचल में सड़क निर्माण की गति बढ़ी — पीएमजीएसवाई के नए चरण और राज्य की ग्राम्य मार्ग योजनाएं चलती रहीं। 2026 में कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास का क्षेत्र सड़क संपर्क की नई मांग के साथ खड़ा है; गांव की सड़क अब हवाईअड्डे-मंडी-मंदिर पर्यटन की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ती है।