देवरिया महोत्सव में निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत
फरवरी 2019 में 'देवरिया महोत्सव' के समापन अवसर पर निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत हुई थी। संग्रह की इस खबर के संदर्भ में यह लेख भारत की 102-108 एम्बुलेंस व्यवस्था और ग्रामीण आपातकालीन सेवा के मायनों पर है।
108 और 102: दो नंबर, एक लाइफलाइन
भारत में 108 नंबर की एम्बुलेंस सेवा 2005 में आंध्र प्रदेश से शुरू हुई और धीरे-धीरे अधिकांश राज्यों में फैली — यह दुर्घटना, हृदयाघात और अन्य आपात स्थितियों की सेवा है। 102 नंबर की 'जननी एक्सप्रेस/जननी शिशु सुरक्षा' व्यवस्था गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए है। दोनों सेवाएं अधिकांश राज्यों में मुफ्त हैं और EMRI जैसे संचालकों के साथ सरकारी-गैर सरकारी भागीदारी में चलती हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में एम्बुलेंस का अर्थ
- गोल्डन आवर — दुर्घटना के पहले घंटे में इलाज मिलने से मृत्यु दर में बड़ा अंतर
- प्रसव आपातकाल — समय पर संस्थागत प्रसव से मातृ और शिशु मृत्यु दर में गिरावट
- मरीज का स्थानांतरण — प्राथमिक केंद्र से जिला अस्पताल तक रेफरल की पहली कड़ी
देवरिया जैसे जिलों की वास्तविकता
पूर्वांचल के जिलों में गांव से जिला अस्पताल की दूरी अक्सर 30-50 किलोमीटर होती है। ऐसे में एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया-समय, वाहन की मरम्मत और चालक-फार्मूला (दो चालक प्रति वाहन) जैसी छोटी व्यवस्थाएं जान बचाने में निर्णायक हो जाती हैं। समारोह में शुरू हुई निःशुल्क सेवा भी इसी अंतर को पाटने की कोशिश थी।
| सेवा | नंबर | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| आपातकालीन एम्बुलेंस | 108 | दुर्घटना, हृदयाघात, सामान्य आपात |
| जननी/शिशु सेवा | 102 | गर्भवती महिला और नवजात परिवहन |
| राष्ट्रीय आपदा/स्वास्थ्य हेल्पलाइन | 112 / 104 | एकीकृत आपातकालीन सहायता |
सेवा को टिकाऊ बनाना
शुभारंभ के बाद असली काम शुरू होता है — ईंधन, चालक के वेतन, जीपीएस निगरानी और कॉल-सेंटर का समन्वय। जिन जिलों में यह चक्र नियमित चला, वहां एम्बुलेंस ने मातृ-स्वास्थ्य के आंकड़े सुधारे। देवरिया महोत्सव की 2019 वाली शुरुआत उसी प्रक्रिया का एक पन्ना थी — छोटा, पर जीवन से जुड़ा।