प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी): देवरिया में लाभार्थियों से वार्ता
जनवरी 2019 में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लाभार्थियों के आवास पर पहुंचकर तत्कालीन सांसद कलराज मिश्र ने उनसे वार्ता की थी — देवरिया नगर का यह दौरा संग्रह में दर्ज है। इसी संदर्भ में यह लेख पीएमएवाई-शहरी की व्यवस्था और 'सबके लिए आवास' के लक्ष्य की वर्तमान स्थिति पर है।
पीएमएवाई-यू की रूपरेखा
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जून 2015 में शुरू हुई — लक्ष्य था शहरी गरीबों को 2022 तक पक्का आवास देना (बाद में समय सीमा बढ़ी)। योजना के प्रमुख घटक हैं — लाभार्थी-आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण (BLC), किफायती क्रय योजना, स्लम पुनर्वास और ऋण-सब्सिडी (CLSS)। बीएलसी घटक में केंद्र की सहायता प्रति मकान 1.5 लाख रुपये है, राज्य अपने हिस्से जोड़ते हैं।
लाभार्थी के घर तक पहुंच का मतलब
- सूची और सत्यापन — वार्ड स्तर की मांग-सर्वे से पात्र परिवार चुने जाते हैं
- किस्तें निर्माण के चरण से जुड़ी होती हैं — आधार, छत, पूर्णता
- महिला के नाम या संयुक्त नाम पर मकान — योजना की सामाजिक विशेषता
- नगर पालिका के जियो-टैगिंग से निर्माण की निगरानी
देवरिया नगर जैसे शहरों की तस्वीर
छोटे नगरों में पीएमएवाई का चेहरा मुंबई-दिल्ली जैसा नहीं — यहां अधिकतर मामले व्यक्तिगत आवास निर्माण के हैं, जहां लाभार्थी अपनी छोटी जमीन पर कमरा-दो कमरे जोड़ता है। 2019 का वह घर-दर्शन इसी चरण की जांच था — किस्त मिली या नहीं, दीवार उठी या नहीं।
| घटक | विवरण | केंद्र सहायता |
|---|---|---|
| BLC (नया निर्माण) | लाभार्थी की भूमि पर पक्का मकान | 1.5 लाख रु. प्रति मकान |
| CLSS (ऋण सब्सिडी) | ब्याज में रियायत | आय-वर्ग अनुसार 2.67 लाख रु. तक |
| स्लम पुनर्वास | उसी स्थान पर पुनर्विकास | 1 लाख रु. प्रति मकान (सामान्यतः) |
2026 में लक्ष्य की दूरी
योजना ने लाखों शहरी परिवारों को पक्की छत दी, पर शहरीकरण की रफ्तार के आगे मांग भी बढ़ती रही — पीएमएवाई-यू 2.0 इसी धारा में आगे बढ़ी। देवरिया के उन परिवारों के लिए, जिनके घर 2019 में बन रहे थे, आवास का अर्थ सिर्फ दीवार नहीं — राशन कार्ड, विद्यालय दाखिला और बैंक खाते का पता है।