तरुण गोगोई: असम के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री की विरासत
23 नवंबर 2020 को गुवाहाटी में तरुण गोगोई का निधन हो गया। 84 वर्ष की आयु में गए यह नेता असम के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड लेकर गए — लगातार तीन कार्यकाल, 2001 से 2016 तक। उनके निधन पर देशभर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया था; राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी अपनी संवेदना दर्ज कराई थी — यह संग्रह पृष्ठ उसी शोक-संदेश का विस्तृत संदर्भ है।
रंगिया से गुवाहाटी तक का सफर
तरुण गोगोई का जन्म 1 अप्रैल 1935 को असम के रंगिया के पास डाक्टर हाबरुंग गांव में हुआ था। जोरहाट से कानून की पढ़ाई करने के बाद वे वकालत से राजनीति में आए। 1971 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और फिर 1976 में असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1990 के दशक में पीवी नरसिम्हा राव मंत्रिमंडल में खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रहे।
तीन कार्यकाल, एक रिकॉर्ड
| वर्ष | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1971 | पहली बार लोकसभा सांसद | जोरहाट से राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश |
| 2001 | पहली बार असम के मुख्यमंत्री | उग्रवाद और वित्तीय संकट से जूझता राज्य संभाला |
| 2006 | दूसरा कार्यकाल | शांति वार्ताओं और विकास कार्यों का दौर |
| 2011 | तीसरा कार्यकाल | लगातार तीसरी जीत — असम में रिकॉर्ड |
| 2016 | चुनावी हार, विपक्ष में | बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार |
| 23 नवंबर 2020 | निधन | कोविड के बाद स्वास्थ्य जटिलताओं से गुवाहाटी में अंत |
शांति और पुनर्निर्माण का दौर
गोगोई के पहले कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है असम में अलगाववादी हिंसा के दौर को धीरे-धीरे शांति वार्ता की मेज तक लाना। उनके समय में राज्य की वित्तीय स्थिति सुधरी, सड़क और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ा और गुवाहाटी एक आधुनिक राजधानी के रूप में उभरी।
क्यों याद रहेंगे तरुण गोगोई
- असम के दीर्घतम मुख्यमंत्री — 15 वर्ष लगातार
- उग्रवाद से शांति वार्ता की ओर राज्य को मोड़ने वाली राजनीतिक कुशलता
- कांग्रेस के सबसे अनुभवी राज्य नेताओं में गिनती
- सादगी और सीधी बात करने की छवि
तीन दशक तक असम की राजनीति के केंद्र में रहा यह नाम आज भी पूर्वोत्तर की सरकारी व्यवस्था और पार्टी संगठन के अध्ययन का हिस्सा है। गोगोई का जीवन दिखाता है कि क्षेत्रीय राजनीति में धैर्य और संस्थागत निरंतरता कितना भारी होती है।