जालोर बस दुर्घटना और सड़क सुरक्षा का सवाल
जनवरी 2021 में जालोर की एक दुखद बस दुर्घटना ने राजस्थान को झकझोरा था। तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त किया था। संग्रह के उस संदेश से आगे बढ़कर यह लेख राजस्थान — और देश — की सड़क सुरक्षा की बुनियादी स्थिति पर एक शांत विश्लेषण है।
आंकड़े क्या कहते हैं
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 'Road Accidents in India' के अनुसार भारत में हर वर्ष सवा लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। राजस्थान लंबे समय से दुर्घटना-मृत्यु में अग्रणी राज्यों में रहा है — इसकी प्रमुख वजहें हैं लंबे राजमार्ग, रेगिस्तानी क्षेत्र में तेज रफ्तार, ट्रकों का भारी दबाव और हाईवे से गुजरते बसें।
बस दुर्घटनाओं के बार-बार के कारण
- रात्रि और सुबह-सुबह की सेवाओं में चालक की थकान और स्लीप-अपनिया जैसी अनदेखी समस्याएं
- क्षमता से अधिक यात्री, खासकर छत पर सवारी — रेगिस्तानी मार्गों पर आम दृश्य
- सिंगल-लेन राज्य मार्गों पर ओवरटेक की जरूरत और तेज गति का मिलना
- वाहन फिटनेस की औपचारिक जांच — कई निजी बसें बिना समय-समय निरीक्षण के चलती हैं
व्यवस्था के जवाब की दिशाएं
केंद्र सरकार ने मोटर व्हीकल (संशोधन) अधिनियम 2019 में जुर्माने कड़े किए और राज्यों को सड़क सुरक्षा प्राधिकरण बनाने को कहा। राजस्थान ने भी सड़क सुरक्षा नीति और 'iRAP' जैसे स्टार-रेटिंग आकलन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। पर कागजी व्यवस्था और धरातल के बीच की दूरी घटनी अभी बाकी है।
| उपाय | स्तर | अपेक्षित असर |
|---|---|---|
| चालक ड्यूटी-घंटे की निगरानी | परिवहन कंपनी/परिवहन विभाग | थकान-दुर्घटनाओं में कमी |
| ब्लैक-स्पॉट सुधार | PWD/NHAI | दुर्घटना-ग्रस्त मोड़ों की मरम्मत |
| गति कैमरा और ई-चालान | यातायात पुलिस | औसत गति में कटौती |
| आपातकालीन ट्रॉमा केंद्र | स्वास्थ्य विभाग | गोल्डन आवर में मृत्यु दर घटना |
शोक से आगे की जरूरत
हर बड़े हादसे के बाद शोक संदेश आते हैं — जैसा कि जनवरी 2021 में भी आया था। पर स्मृति का सही अर्थ तब निकलता है जब उसी मार्ग का ब्लैक-स्पॉट सुधरता है, उसी बस सेवा की फिटनेस जांची जाती है और उसी रात्रि शिफ्ट का चालक-रोटेशन बदलता है। सड़क सुरक्षा आखिरकार तकनीक और अनुशासन का विषय है, भावना का नहीं।