देवरिया · लखनऊ · जयपुर — अभिलेखागार 2012–2021

कोविड काल में पत्रकारिता: जयपुर के मीडिया कर्मियों को हाइजीन किट

समाचार · कलराज मिश्र · 2026

कोविड-19 महामारी के दौरान जब अधिकांश व्यवस्थाएं घरों के भीतर सिमट गईं, तब भी एक पेशा सड़क पर रहा — पत्रकारिता। जून 2020 में राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने जयपुर के मीडिया प्रतिनिधियों को हाइजीन किट भेजी थी। संग्रह की इस घटना के संदर्भ में यह लेख उस दौर की फ्रंटलाइन पत्रकारिता और उसके सबक पर है।

जोखिम के बीच खबर का काम

2020 की पहली और दूसरी लहर के बीच संवाददाता अस्पतालों, श्मशानों, राहत शिविरों और बंद सड़कों पर मौजूद रहे। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और कई संपादकीय संगठनों ने उस दौर में मीडियाकर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने और प्राथमिकता से टीकाकरण की मांग उठाई थी। कई राज्यों ने बाद में पत्रकारों के लिए टीकाकरण के विशेष सत्र और बीमा योजनाएं शुरू कीं।

उस दौर की तीन बड़ी चुनौतियाँ

  • स्वास्थ्य जोखिम: मास्क, सैनिटाइजर और दूरी के बावजूद सैकड़ों पत्रकार संक्रमित हुए; कई की मृत्यु हुई
  • आर्थिक दबाव: विज्ञापन राजस्व गिरने से कई अखबारों में वेतन कटौती और छंटनी हुई
  • जानकारी का संकट: धरातल पर पहुंच सीमित थी, इसलिए प्रेस नोट और आधिकारिक आंकड़ों पर निर्भरता बढ़ी

हाइजीन किट जैसी पहलों का मतलब

उस दौर में कई संस्थाओं और सार्वजनिक कार्यालयों ने पत्रकारों, स्वास्थ्यकर्मियों और स्वयंसेवकों को सुरक्षा सामग्री भेजी। जयपुर में राजभवन से भेजी गई किट भी उसी शृंखला की कड़ी थी — छोटा इशारा, पर फ्रंटलाइन पर खड़े व्यवसाय के प्रति मान्यता का प्रतीक।

पहलविवरणलाभार्थी
हाइजीन किट वितरणमास्क, सैनिटाइजर, दस्तानेफील्ड रिपोर्टर, फोटोग्राफर
प्राथमिकता टीकाकरणकई राज्यों में विशेष सत्रपत्रकार और उनके परिवार
बीमा योजनाएंराज्य स्तर की समूह बीमा पहलेंस्वीकृत पत्रकार

2026 की दृष्टि से सबक

महामारी के वर्ष दिखा गए कि सूचना का निर्बाध प्रवाह किसी आपदा में उतना ही जरूरी है जितना दवा और राशन। संपादकीय संगठन अब आपदा-कवरेज के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और बीमा को स्थायी मांग के रूप में उठाते हैं। फ्रंटलाइन पत्रकारिता की कीमत का हिसाब उस दौर ने सबको करा दिया था।