Thursday , 28 May 2020

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Judicial Accountability Book Inaugration

भारतीय गणतंत्र की स्थापना (26.01.1950) के पश्चात संसदीय लोकतान्त्रिक व्यवस्था के समुचित ढंग से परिचालन हेतु मान्टेस्क्यू के शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त को प्रशासन का आधार माना गया जिसके अनुसार लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ – कार्यपालिका, न्यायपालिका व विधायिका अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह समुचित ढंग से कर सके। कार्यपालिका व विधायिका की कार्य प्रणाली, उपलब्धियों व असफलताओं पर अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार हर नागरिक को है। इनकी आलोचना व प्रशंसा ससद या संसद से बाहर विभिन्न फोरमों को माध्यम से की जा सकती है। परन्तु देश की न्यायपलिका में देश के प्रत्येक नागरिक का अटूट विश्वास होने के कारण …

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