Saturday , 27 February 2021

विश्वस्तरीय अकादमिक संस्थानों के रूप में विकसित हों विश्वविद्यालय

राजस्थान विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षान्त एवं 75वां स्थापना दिवस समारोह वर्चुअल आयोजित

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने आह्वान किया है कि विश्वविद्यालय नवाचारों पर ध्यान देते हुए अपने यहां ‘नवाचार’ केन्द्र विकसित करने की पहल करें। उन्होंने संकायवार ऐसे नवाचार केन्द्र अपने यहां स्थापित किए जाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के बड़े केन्द्र ही नहीं बनें बल्कि विश्वस्तरीय अकादमिक संस्थानों के रूप में विकसित हों। उनमें युगानुरूप पाठ्यक्रम अकादमिक गुणवत्ता के साथ तैयार किए जाने चाहिए।

श्री मिश्र शुक्रवार को यहां राजस्थान विश्वविद्यालय के 30 वें दीक्षान्त समारोह एवं 75 वें स्थापना दिवस पर ऑनलाइन सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए शिक्षक, विद्यार्थी तथा प्रशासन एक अभियान की तरह कार्य करें।

कुलाधिपति श्री मिश्र ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय ऐसा शिक्षा मॉडल विकसित करें जिससे न केवल मस्तिष्क विकसित हो बल्कि युवाओं की सकारात्मक मानसिकता भी बनाने में उसका योगदान हो। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाने की ही अपनी भूमिका का निर्वहन नहीं करें बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए युवाओं के मार्गदर्शन में भी अपना योगदान दें। उन्होंने प्राध्यापकों को पाठ्यपुस्तकों के साथ ही अधुनातन ज्ञान से निरंतर अपने आपको अपडेट रखने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रयास यह होना चाहिए कि विश्वविद्यालय ज्ञान के महान केंद्र बनें।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा ज्ञान का प्रसार करती है परन्तु अनुसंधान नए ज्ञान का सृजन करता है। नवान्वेषण के जरिए ही विद्यार्थी अर्जित ज्ञान को सामाजिक संपदा के रूप में सबकी भलाई में उपयोग कर सकता है। उन्होंने कोरोना के विकट दौर की चर्चा करते हुए कहा कि इस समय में आॅनलाइन शिक्षा के अवसर तेजी से बढ़े हैं, इसलिए यह जरूरी है कि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की सहायता से अद्यतन शिक्षा पद्धति का विकास करें।

कुलाधिपति श्री मिश्र ने कहा है कि विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति के आलोक में आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दृष्टि से स्वयं को विकसित करें। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए बहुत से विश्वविद्यालयों ने रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने की पहल की है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक है जो देश में आ रहे बदलाव और प्रगति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत और भारतीयता को केन्द्र में रखकर तकनीकी, वैज्ञानिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से स्वयं को इस प्रकार विकसित करें कि राजस्थान विश्वविद्यालय देशभर में आदर्श माॅडल के रूप में अपनी विशेष पहचान भविष्य में बनाए।

कुलाधिपति श्री मिश्र ने दीक्षान्त समारोह में शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि तथा विभिन्न संकायों में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये।

राज्यपाल श्री मिश्र ने अपने दीक्षान्त उद्बोधन से पूर्व समारोह में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान की उद्देश्यिका एवं संविधान के अनुच्छेद 51 (क) में वर्णित मूल कत्र्तव्यों का वाचन भी करवाया।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री भंवर सिंह भाटी ने अपने सम्बोधन में इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राजस्थान विश्वविद्यालय को यूनिवर्सिटी विद पोटेंशियल फाॅर एक्सिलेंस के अन्तर्गत देश के शीर्ष पन्द्रह विश्वविद्यालयों में चयनित किया गया है। उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का नाम रोशन करने वाले शोधार्थियों सहित दीक्षान्त समारोह में पीएचडी की उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव जैन ने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की शैक्षणिक विकास यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री के.एम. दूड़िया ने उपस्थित अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार एवं प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्द राम जायसवाल भी उपस्थित थे।

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