Sunday , 11 April 2021

स्वस्थ विचार प्रक्रिया के लिए पुस्तकीय अध्ययन जरूरी

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने कहा कि पुस्तकें बौद्धिक स्तर पर विद्यार्थियों को संपन्न ही नहीं करती बल्कि निरंतर नये ज्ञान प्राप्ति के लिए भी प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकीय अध्ययन से हमारी विचार प्रक्रिया को गति मिलती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक किसी के पास होना अलग बात है परन्तु उसको पढ़ना अलग। पुस्तकों के अध्ययन के बाद व्यक्ति ज्ञान के प्रकाश में रूपान्तरित हो जाता है। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में पुस्तकालयों के होने को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संचार प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के बावजूद छपी पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों को अकादमिक स्तर पर समृद्ध करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने पर भी जोर दिया तथा कहा कि वहां संवैधानिक जागरूकता, पुस्तकालयों के प्रति रूझान पैदा करने की गतिविधियां भी नियमित आयोजित करवाने की पहल हो।

श्री मिश्र आज यहां राजभवन से कोटा विश्वविद्यालय, कोटा में केन्द्रीय पुस्तकालय एवं अकादमिक भवन, संविधान पार्क, कन्या छात्रावास, रसायन शास्त्र प्रयोगशाला के ऑनलाइन लोकार्पण बाद आयोजित समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संविधान वाटिका को विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि संविधान के मूल अधिकारों की जानकारी तो बहुत से लोगों को है परन्तु मूल कर्त्तव्य क्या है, इसकी जानकारी सामान्य तौर पर नहीं है। संविधान वाटिकाओं की स्थापना से इस दिशा में जागरूकता आएगी।

विश्वविद्यालय में नवीन निर्माण कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होने कहा कि इनसे विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय अध्ययन सुविधायें ही प्राप्त नहीं होगी बल्कि वे और अधिक जागरूक हो अपने भविष्य का निर्माण कर पाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों के विकास के लिए वहां आधारभुत सुविधाओं और नवाचारों को आवश्यक बताते हुए इसके लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जाने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने प्राचीन ज्ञान के महान केन्द्र नालन्दा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय की चर्चा करते हुए कहा कि बख्तियार खिलजी ने उसका विनाश किया तो हमारे प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को नष्ट करते वहां के समृद्ध पुस्तकालय को भी जला दिया। वहां इतनी पुस्तकें थी कि कईं महिनों तक पुस्तकालय की आग धधकती रही। उन्होंने कोटा विश्वविद्यालय में केन्द्रीय पुस्तकालय भवन के लोकार्पण के कदम को महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि बेहतरीन पुस्तकों की उपलब्धता की दृष्टि से यह देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

श्री मिश्र ने हाड़ौती क्षेत्र में कोटा विश्वविद्यालय को प्रमुख अध्ययन केन्द्र बताते हुए कहा कि अपने स्थापना वर्ष से ही अपने सीमित साधनों एवं निष्ठावान सदस्यों के सहयोग से यह निरन्तर उन्नति की ओर अग्रसर है। उन्होंने विश्वविद्यालय को एनआईआरएफ में 78वीं रैंक तथा नेक द्वारा ‘बी’ ग्रेडिंग प्राप्त करने की भी सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी, डाॅ. भीमराव अम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय आदि महापुरूषों के विचारों पर शोध हेतु शोध पीठों की स्थापना के कदम को भी महत्वपूर्ण बताया।

राज्यपाल ने इससे पहले संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का वाचन करवाया। इस मौके पर नगरीय विकास मंत्री श्री शांति धारीवाल ने कोटा क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार में उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। उच्च शिक्षा मंत्री श्री भंवरसिंह भाटी ने राज्यपाल द्वारा संविधान जागरूकता के लिए किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। कुलपति प्रो. नीलिमा सिंह ने सभी का स्वागत किया। सभी का आभार प्रो. एन.के. जैमन ने जताया।

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