Saturday , 28 November 2020

सामाजिक समरसता और सामंजस्य भाव के साथ जनजाती क्षेत्र का विकास हो

जनजाती क्षेत्र के लोगों को अनुभव कराएं कि वे मुख्यधारा से जुड़े हैं
सामाजिक समरसता और सामंजस्य भाव के साथ जनजाती क्षेत्र का विकास हो
महाराष्ट्र मॉडल का परीक्षण कर उसे लागू किए जाने के भी दिए निर्देश
कोचिंग संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त सफल जनजाती युवाओं की सूची बना उनका सम्मेलन हो ताकि दूसरों को भी मिले प्रेरणा
जनजाती क्षेत्रों में पैरामेडिकल और शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए – राज्यपाल

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि राज्य सरकार स्तर पर जनजातीय क्षेत्र के लोगों को यह अनुभव कराना जरूरी है कि वे मुख्यधारा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय और गैर जनजातीय क्षेत्र में असमानता कैसे रुके, इसके समाधान के लिए भी प्रभावी प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास के अंतर्गत सामाजिक समरसता का विशेष ध्यान रखते हुए समन्वय रखकर कार्य करने के निर्देश दिए तथा कहा कि इसी से जनजातीय क्षेत्र में विकास के और अधिक अवसर स्थानीय समुदाय को मिल सकेंगे।

श्री मिश्र शुक्रवार को राजभवन में जनजाति कल्याण हेतु संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने नवाचारों के जरिए जनजाती क्षेत्र के लोगों को अधिकाधिक रूप में लाभान्वित किए जाने, उनमें आत्मविश्वास का सृजन किए जाने और जनजाती क्षेत्र के नेताओं के साथ-साथ अन्य समुदाय के लोगों द्वारा भी उनके लिए कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामंजस्य, समरसता का भाव रखते हुए सभी मिलकर जनजातीय विकास के लिए कार्य करेंगे तभी उन्हें महसूस होगा कि वे मुख्य धारा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने जनजाती क्षेत्र के 40 गांवो को आदर्श गांव बनाए जाने के उनके सुझाव की भी समीक्षा की तथा कहा कि इस दिशा में और अधिक प्रभवी प्रयास किए जाने की जरूरत है। इसी तरह उन्होंने अनुसूचित क्षेत्र में उत्तर मैट्रिक छात्रवृति के भुगतान को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने, आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए महाराष्ट्र विकास मॉडल का परीक्षण कर उसे लागू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि असली मकसद यही है कि जनजाती क्षेत्रों के लोगों का अधिकाधिक कल्याण हो। इसमें किसी स्तर पर कोताही नहीं की जानी चाहिए।

श्री मिश्र ने जनजाति क्षेत्र के 8 जिलों में पीएमटी, पीईटी आदि की कोचिंग से लाभान्वित होकर मेडिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने वाले युवाओं की सूची बनाने और उनका सम्मेलन करवाने के भी निर्देश दिए ताकि वहां के दूसरे युवाओं को प्रेरणा मिले। श्री मिश्र ने इसी तरह कौशल विकास के अंतर्गत भी क्षेत्र विशेष की आवश्यकतानुसार लाभान्वित लोगों, स्वावलम्बी बने युवाओं की सूची बनाकर उनका सम्मेलन करने पर जोर दिया ताकि आदिवासी क्षेत्र में प्रोत्साहन का वातावरण बन सके।

राज्यपाल ने जनजाति क्षेत्र में कई स्थानों पर विकास कार्यों पर शून्य फीसदी खर्च को गम्भीरता से लेने के निर्देश दिए तथा कहा कि इसके क्या कारण रहे, इसकी सतत मोनिटरिंग की जाए। उन्होंने जनजाति क्षेत्र में बने होस्टलस का जिस प्रयोजन से वे बनाये गए है, उसी प्रयोजन से उनका समुचित उपयोग हो, इसे भी विशेष रूप से देखे जाने और इसकी माॅनिटरिंग किये जाने की अधिकारियों को विशेष रूप से हिदायत दी। उन्होंने कहा कि होस्टल में कहां कितने छात्र हैं, इसे देखे जाने और वहां पर्याप्त सुविधाएं है, इसकी भी प्रभावी माॅनिटरिंग की जाए।

श्री मिश्र ने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि जनजाति क्षेत्रों में प्रधानमंत्री सड़क ग्राम योजना के लिए राशि मिलने के बाद भी सड़कें बनी क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर इसे विशेष रूप से देखें।

राज्यपाल ने जनजाति क्षेत्रों में पैरामेडिकल के और शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे जाने के लिए भी त्वरित कार्यवाही किये जाने के लिए सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार वहां के लोगो के लिए विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कल्याण योजनाओं से अधिकाधिक लाभान्वित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन विकास पर फोकस रखते हुए भी इस तरह से कार्य किया जाए कि पर्यटन गतिविधियेां से स्थानीय लोगों को रोजगार और अन्य क्षेत्रों में निरन्तर लाभ हों।

राज्यपाल श्री मिश्र ने राज्य के जनजाति क्षेत्र के निवासियों में तम्बाकू चबाने की प्रवृति में भारी वृद्धि पर चिंता जताते हुए इस प्रवृत्ति को रोके जाने हेतु जिलों में विशेष अभियान चलाकर कार्य किये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कोरोना से बचाव के लिए भी जिलों में लोगों को मास्क पहनकर बाहर निकलने, दो गज की दूरी बनाये रखने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे जाने का आह्वान किया। इस संबंध में उन्होंने जिला कलेक्टरों से कोरोना से बचाव के लिये किये जा रहे प्रयासों के बारे में भी बैठक में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से इसे कैसे रोक सकते हैं, इस पर निरन्तर प्रयास किये जायें।

राज्यपाल श्री मिश्र ने जिला कलक्टर बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, पाली, राजसमन्द, सिरोही, चित्तौड़ और उदयपुर से वहां जनजाती क्षेत्र के विकास के लिए क्रियान्वित की जा रही योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली।
राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार ने जनजाती क्षेत्रों में चलायी जा रही विकास योजनाओं के साथ ही राज्यपाल श्री मिश्र द्वारा पूर्व में दिए सुझावों की क्रियान्विति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जनजाती विकास के लिए निर्धारित कार्ययोजना का समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए। राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्दराम जायसवाल ने विभिन्न स्तरों पर लाभान्वित जनजाती युवाओं की सूची बना राज्यपाल महोदय के निर्देशानुसार उनके सम्मेलन पर जोर दिया।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, जनजाती क्षेत्र श्री राजेश्वर सिंह ने बताया कि जनजाती क्षेत्र में विकास के लिए राज्यपाल द्वारा दिए सुझावों पर गति से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतापगढ और बांसवाड़ा में अन्तर्राष्ट्रीय इण्डोर स्टेडियम बनाया जा रहा है। कौशल प्रशिक्षण के अंतर्गत 33 क्षेत्रों में 133 विधाओं में जनजाती क्षेत्र के लोगों के प्रशिक्षण की पहल की गयी है। इसी तरह ‘‘ट्राईबल होम स्टे‘‘ योजना के तहत पर्यटन पर फोकस कर जनजाती कल्याण के लिए कार्य करने की योजनाओं पर कार्य चल रहा है। इससे पहले निदेशक, जनजाती कल्याण श्रीमती कविता सिंह द्वारा राज्यपाल श्री मिश्र के निर्देशानुसार आदिवासी कल्याण के लिए निर्धारित एजेण्डा बिंदुओं का पावर पोइन्ट प्रस्तुतिकरण दिया गया।

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