Monday , 18 October 2021

हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन की कारगर नीति तैयार हो

‘स्वयंसिद्धा’ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन

उद्यमिता के विकास के लिए प्रभावी वातावरण बनाए जाने की जरूरत

हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन की कारगर नीति तैयार हो – राज्यपाल

जयपुर, 8 अक्टूबर। राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने समाज में उद्यमिता के विकास के लिए प्रभावी वातावरण बनाए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित करके स्थानीय क्षेत्र से जुड़े हस्तशिल्प उत्पादों के अधिकाधिक विपणन की कारगर नीति पर सभी स्तरों पर कार्य किया जाना चाहिए।

श्री मिश्र शुक्रवार को जवाहर कला केन्द्र में हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद तथा लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित ‘स्वयंसिद्धा’ हस्तशिल्प प्रदर्शनी के उद्घाटन बाद आयोजित समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उद्यमिता के लिए स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग एवं उत्पादन के नवीनतम तरीकों संबंधित आवश्यक जानकारियां यदि समय पर नव उद्यमियों को उपलब्ध करायी जाती हैं तो देश में उद्यमिता के जरिए तेजी से आर्थिक विकास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिन महिला उद्यमियों के उत्पाद हस्तशिल्प प्रदर्शनी में प्रदर्शित हुए हैं, उनमें से उत्कृष्ट उत्पादों की सूची बनाकर उनके विपणन एवं निर्यात की योजना पर भी लघु उद्योग भारती सुनियोजित तरीके से कार्य करे।

श्री मिश्र ने महिला शक्ति की चर्चा करते हुए कहा कि बहुत से स्तरों पर वे पुरूष से अधिक सशक्त होती हैं और उनमें हुनर भी अधिक होता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में महिलाओं के उद्यमी बनने के गुणों की पहचान करते उन्हें उद्यमिता में निरंतर आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में बड़े उद्योगों की तुलना में अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत में अधिक रोजगार अवसर उपलब्ध होते हैं। इनसे देश की बेराजगारी का वास्तविक रूप में निदान हो सकता है। इसलिए इनके प्रोत्साहन पर भी सभी स्तरों पर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास के साथ ही इनमें महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और इनके जरिए ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण को व्यावहारिक रूप में गति दिए जाने पर जोर दिया।

श्री मिश्र ने उत्पादन वृद्धि को समाज के चहुंमुखी विकास के रूप में देखे जाने और ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास को सर्वोपरि रखे जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प उत्पादों का लाभ निर्यात क्षेत्र और किसी एक वर्ग विशेष के उपयोग के लिए नहीं हो बल्कि इन उत्पादों के विपणन का स्वरूप ऐसा हो जो गरीबी और असमानता को कम करने में सहायक सिद्ध हो। उन्होंने ग्रामीण हस्तशिल्पियों को उनके उत्पाद विपणन के लिए अवसर प्रदान करने, महिलाओं के सर्वांगीण उद्यमिता विकास के घटकों को ध्यान में रखते हुए भी कार्य किए जाने की आवश्यकता जताई।

सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के लिए लघु उद्योग एवं हस्तशिल्प के महत्व को रेखांकित करते हुए इस तरह के प्रयासों की सराहना की। सांसद श्रीमती जसकौर मीणा ने कहा कि महिलाएं आज शिक्षा, विज्ञान, वाणिज्य एवं खेल सहित सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। कला, कौशल और हस्तशिल्प के क्षेत्र में भी उनमें नैसर्गिक प्रतिभा होती है, जिसे उचित मंच उपलब्ध करवाए जाने की जरूरत है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन कर हस्तशिल्प उत्पादों का किया अवलोकन

इससे पहले, राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद तथा लघु उद्योग भारती महिला संगठन जयपुर की ओर से आयोजित स्वयंसिद्धा हस्तशिल्प प्रदर्शनी – 2021 का यहाँ जवाहर कला केन्द्र परिसर में दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाटन किया। राज्यपाल ने महिला उद्यमियों द्वारा यहां लगाए गए लगभग 170 स्टॉलों का अवलोकन किया तथा उनके हस्तशिल्प उत्पादों को सराहा।

इस अवसर पर लघु उद्योग भारती राजस्थान के अध्यक्ष श्री घनश्याम ओझा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश मित्तल, संस्था की जयपुर महिला इकाई की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता शर्मा, प्रख्यात हस्तशिल्प कर्मी श्रीमती रुमा देवी, पुणे से पहुंची श्रीमती स्मिता घईसास सहित बड़ी संख्या में महिला उद्यमी एवं लघु उद्योग संगठनों से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी तथा पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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