Saturday , 28 November 2020

विलुप्त होती स्थानीय कलाओं और कलाकारों के संरक्षण के लिए हो प्रभावी कार्य

राज्यपाल श्री मिश्र ने ली पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की विशेष ऑनलाइन समीक्षा बैठक
सभी की समुचित सहभागिता से हो गतिविधियां का क्रियान्वयन
विलुप्त होती स्थानीय कलाओं और कलाकारों के संरक्षण के लिए हो प्रभावी कार्य -राज्यपाल

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कलाओं के संरक्षण, कलाकारों के प्रोत्साहन के साथ ही सांस्कृतिक गतिविधियां के क्रियान्वयन में सभी की समुचित सहभागिता रखे जाने का आह्वान किया है। उन्होंने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र की संचालन और कार्यकारी समिति में किए जाने वाले परिवर्तन में सभी की समुचित भागीदारी सुनिश्चित किए जाने के साथ ही इन दोनों समितियों को और अधिक प्रभावी किए जाने के भी निर्देश दिए।
राज्यपाल श्री मिश्र पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की विशेष ऑनलाइन समीक्षा बैठक में संबोधित कर रहे थे। बैठक में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन-द्वीप, दादरा-नागर हवेली आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में राज्यपाल श्री मिश्र ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र से जुड़े कलाकारों, समिति सदस्यों, अधिकारियों के सुझाव भी सुने तथा कहा कि जनजातीय और ग्रामीण कलाओं के संरक्षण और विकास के लिए सभी स्तरों पर समन्वय रखते हुए कार्य किए जाने चाहिए। संवादहीनता से आशंकाएं उत्पन्न होती है, इसलिए इससे सभी स्तरों पर बचना चाहिए।
श्री मिश्र ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा कोविड के इस दौर में कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त किए जाने के प्रयास भी प्रभावी स्तर पर किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केन्द्र सदस्य राज्यों के कला संस्कृति विभागों की समुचित सहभागिता रखते हुए सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के कार्य करे। इसी से हम अपनी कला विरासत को भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रख पाएंगे।
राज्यपाल ने कहा कि विलुप्त होती स्थानीय कलाओं, लोक और जनजाति कलाओं को राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ लाने के लिए भी महत्ती कार्य किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखण्डता के परिचायक ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ में पूर्वोत्तर राज्यों को अपने सदस्य राज्यों के और नजदीक लाने के प्रयास भी पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र करें ताकि आने वाली पीढ़ियां हमारी कला और संस्कृति का वैश्विक स्वरूप देख सके।
श्री मिश्र ने कहा कि जनजातीय और ग्रामीण लोक कलाओं को पुर्नजीवित करने और उन्हें प्रचलन में बनाए रखने के साथ ही भारत के पश्चिम अंचल के कलाकारों के प्रोत्साहन में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की महत्ती भूमिका है। स्थानीय स्तर पर वृहद स्तर पर जनभागीदारी भी जरूरी है।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा राजस्थान में शिल्पग्राम उत्सव, गोवा में लोकोत्सव, गांधीनगर में बसंतोत्सव, महाराष्ट्र में लोकतरंग आदि के आयोजनों और कला संरक्षण कार्यों की राज्यपाल श्री मिश्र ने सराहना की तथा कहा कि देश की विविधता में एकता की संस्कृति को बनाए रखने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं। केन्द्र और राज्य सरकार के स्तर पर समुचित प्रतिनिधित्व रखते हुए ऐसे आयोजन गांव-देहातों में निरन्तर होने से स्थानीय स्तर पर कलाएं संरक्षित होती है और इनमें अधिकाधिक जन भागीदारी सुनिश्चित हो सकती है।
भारत सरकार की संयुक्त सचिव श्रीमती अमिता साराभाई ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र की संचालन और कार्यकारी समिति के अंतर्गत लिए गए निर्णयों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल श्री मिश्र के सुझावों के आधार पर केन्द्र द्वारा भविष्य की कार्ययोजना को क्रियान्वित किया जाएगा। इससे पहले राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार ने केन्द्र की संचालन समिति और कार्यकारी समिति के सबंध में अपने सुझाव दिए। कला एवं संस्कृति विभाग की सचिव श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने भी इस दौरान सांस्कृतिक कला केन्द्र की गतिविधियां को प्रभावी करने हेतु अपने सुझाव रखे।

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