Wednesday , 24 February 2021

बगैर भेदभाव के समग्र एवं समन्वित विकास पर हो कार्य

‘डिजिटल हैल्थ, सस्टेनेबल डवलपमेंट एण्ड वेलबिंग’ पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

‘नेशनल डिजिटल हैल्थ मिशन’ के जरिए सस्ती और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं की हुई पहल

बगैर भेदभाव के समग्र एवं समन्वित विकास पर हो कार्य
-राज्यपाल

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि वही विकास स्थायी रूप से कायम रह सकता है जिसमें सभी के बेहतर स्वास्थ्य के साथ बगैर भेदभाव के समग्र एवं समन्वित विकास पर कार्य किया जाए। उन्होंने ‘डिजिटल हैल्थ’ की टिकाऊ विकास विचारधारा पर सभी स्तरों पर कार्य किए जाने पर जोर दिया है।

श्री मिश्र बुधवार को आई.आई.एच.एम.आर. विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘डिजिटल हैल्थ, संस्टेनेबल डवलपमेंट एण्ड वेलबिंग’ विषयक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘प्रदान्य’ में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और समग्र और सतत विकास के अंतर्गत प्रारम्भ किए गए ‘नेशनल डिजिटल हैल्थ मिशन’ की चर्चा करते हुए कहा कि इसके जरिए देशभर के नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।

राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल हैल्थ’ सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की महती कड़ी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ राष्ट्र ही सतत विकास के आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। ‘डिजिटल हैल्थ, सस्टेनेबल डवलपमेंट एण्ड वेलबिंग’ के तहत विश्वभर में असमानताओं को खत्म कर टिकाऊ विकास मानदंडों को सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मानवता की प्रगति के लिए समग्र विकास ही इस समय एक मात्र विकल्प है।

श्री मिश्र ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के साथ ही विश्वभर में उत्कृष्ट स्वास्थ्य प्रबंधन को भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भारतीय अवधारणा की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय दृष्टि आरम्भ से ही समन्वित एवं समग्र विकास की रही है। उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत टेलीमेडिसिन, चिकित्सा शोध एवं अनुसंधान आदि पर विश्व स्तर के प्रयासों को आम जन हेतु परस्पर साझा किये जाने का भी आह्वान किया। उन्होंने आई.आई.एच.एम.आर. विश्वविद्यालय द्वारा डिजिटल हैल्थ के संबंध में किए जा रहे प्रयासो की सराहना भी की।

भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू के पूर्व निदेशक प्रो. जी.पी. पद्मनाभन ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए कहा कि भारत डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष शुरू किया गया राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिसके अन्तर्गत प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य, बीमारियों, उपचार एवं परीक्षण संबंधी समस्त जानकारी उसके स्वास्थ्य कार्ड में संग्रहित की जाएगी।

एम्स नई दिल्ली के पूर्व प्रो. डाॅ. चन्द्रकांत एस पांडव ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य के 8 आयामों शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक, सामाजिक, आध्यात्मिक, व्यवसायिक, वित्तीय एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के अन्तर्सम्बंधों की चर्चा की।

ऑनलाइन सम्मेलन के दौरान आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डाॅ. एस. डी. गुप्ता एवं प्रेसिडेन्ट डाॅ. पी. आर. सोडानी ने भी विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम के आरम्भ में राज्यपाल श्री मिश्र ने संविधान की उद्देश्यिका तथा मूल कत्र्तव्यों का वाचन करवाया।
सम्मेलन के दौरान राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ ऑनलाइन उपस्थित थे।

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