Sunday , 11 April 2021

संविधान देश का सर्वोच्च विधान -राज्यपाल

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि संविधान देश का सर्वोच्च विधान ही नहीं है बल्कि यह वह पवित्र ग्रंथ है जिससे विश्व के सबसे बड़े हमारे लोकतांत्रिक देश का संचालन होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में संविधान पार्क की स्थापना से देश के युवाओ में संवैधानिक जागरूकता आएगी। इससे अधिकारों और कर्तव्यों के संतुलन की समझ विकसित होगी

श्री मिश्र आज यहां संविधान दिवस पर मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में ऑनलाइन आयोजित संविधान पार्क के शिलान्यास समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में संविधान पार्क की स्थापना के पीछे मंशा यही है कि देश के युवाओ में संवैधानिक जागरूकता आए। वे यह जानें कि संविधान हमें कौन-कौन से अधिकार देता है और कौन-कौन से हमारे कर्तव्य हैं। उन्होंने कहा कि संविधान वाटिकाओं की स्थापना से इस बात का संदेश भी युवा पीढ़ी में जाएगा कि समतामूलक ऐसे समाज के निर्माण के वह इस संविधान के जरिए सहभागी हैं जिसमें न्याय की अवधारणा पर सबसे अधिक बल है।

श्री मिश्र ने कहा कि पूरे संसार के देशों के संविधानों से सर्वश्रेष्ठ प्रस्तावना भारतीय संविधान की है। संविधान की हमारी प्रस्तावना में ही स्पष्ट है कि संविधान की शक्ति सीधे जनता में निहित है। उन्होंने संविधान के प्रारम्भिक वाक्य ‘हम भारत के लोग’ की चर्चा करते हुए कहा कि संविधान किन आदर्शों, आकांक्षाओं को प्रकट करता है, इसे संविधान उद्देशिका से स्पष्ट समझा जा सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत का संविधान मानव अधिकारों और कर्तव्यों का वैश्विक दस्तावेज है। मानव अधिकारों की सुरक्षा की विश्वसनीय व्यवस्था कहीं पर है तो वह भारतीय संविधान में ही है। उन्होंने कहा कि संविधान जब बना तब यह तय किया गया था कि वह ऐसा बने कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति का उसमें दर्शन हो। उन्होंने संविधान में प्रख्यात कलाकार नंदलाल बोस व उनके साथी कलाकारों द्वारा उकेरे चित्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का जीवन दर्शन भारतीय संविधान की मूल प्रति पर है। उन्होंने संविधान की मूल प्रति पर राजस्थान के प्रख्यात कलाकार कृपालसिंह शेखावत के चित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे राजस्थान के लिए गर्व की बात है।

श्री मिश्र ने संविधान दिवस पर अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों की पालना का भी आह्वान किया। उन्हानें कहा कि संविधान में दिए अधिकारों के प्रति तो हम जागरूक होते हैं परन्तु कर्तव्यों के प्रति उदासीन होते हैं। लोकतंत्र में अपने हितों के लिए जनता का सक्रिय हस्तक्षेप होना चाहिए। परन्तु यह हस्तक्षेप जन-धन की हानि, राष्ट्रीय संपति के नुकसान के रूप में नहीं होना चाहिए। उन्होंने इससे पहले संविधान की प्रस्तावना और कर्तव्यों का भी वाचन करवाया।

इस अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री विनित कुमार ने संविधान से जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री कुलदीप माथुर ने संवैधानिक व्यवस्था और नियम-कानूनों से जुड़े मसलों पर अपनी बात रखी। हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति श्री ओम थानवी ने कहा कि राज्यपाल द्वारा प्रत्येक विश्वविद्यालय में संविधान वाटिका के निर्माण की पहल पूरे देश में अनूठी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रांगण में दाखिल होते ही संविधान वाटिका विद्यार्थियों को हर घड़ी यह याद दिलाएगी कि संविधान का उनके लिए क्या महत्व है। उन्होंने संविधान पार्क की चर्चा करते हुए कहा कि पूरा देश इस बात को सदा याद करेगा कि राजस्थान में इस तरह की पहल किसी राज्यपाल ने की है। उन्होंने संविधान में कलात्मक चित्रण और सर्वधर्म सद्भाव के उल्लेखों की भी चर्चा की। इससे पहले मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह ने संविधान पार्क के शिलान्यास को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राजस्थान में शिक्षण के साथ संविधान जागरूकता की दिशा में राज्यपाल महोदय की इस पहल के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।

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