Tuesday , 28 September 2021

किसानों को कृषि से अधिकाधिक लाभ मिले, युवाओं को कृषि से जोड़ने के कृषि प्रबन्ध पाठ्यक्रमों की पहल हो -राज्यपाल

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कृषि शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न फसलों की उच्च गुणवत्तायुक्त किस्मों के विकास के साथ स्थान विशेष की जलवायु के अनुरूप अधिक उत्पादन की खेती का प्रसार किए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने ऐसे शोध कार्यों में रूचि लेकर कार्य करने पर भी जोर दिया है, जिनसे किसानों को कृषि से अधिकाधिक लाभ मिल सके। उन्होंने युवाओं को कृषि से अधिकाधिक जोड़े जाने के लिए कृषि प्रबन्ध के नवीन पाठ्यक्रमों की पहल किए जाने की भी आवश्यकता जताई।

श्री मिश्र शनिवार को श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर के प्लेटिनम जुबली वर्ष के शुभारम्भ समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि में इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि हम देखा-देखी विदेशी परियोजनाओं को ही नहीं अपनाएं बल्कि हमारी जलवायु, मिट्टी की उर्वरा शक्ति और सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की उपलब्धता के अनुरूप फसलों का अधिक उत्पादन लेने के प्रयास करें। उन्होंने कृषि शोध एवं अनुसंधान में भारतीय चिंतन और दृष्टि का अधिकाधिक समावेश किए जाने का भी आह्वान किया।

श्री मिश्र ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां हैं। यहां के किसानों के पास खेती से जुड़े विरल अनुभव हैं। इन सबका समावेश करते हुए विद्यार्थी ऐसी शोध परियोजनाओं पर कार्य करें जिनसे भारतीय संस्कृति के अनुरूप कृषि विकास को गति मिल सके।

उन्होंने जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा पोषण तत्वों से भरपूर बाजरे, जौ, सौंफ की नवीन किस्में विकसित किए जाने, स्थानीय किसानों और बीज एजेंसियों को गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने के कार्यों की सराहना भी की।

उन्होंने जोबनेर कृषि महाविद्यालय द्वारा 74 वर्षों की गौरवमय यात्रा पूर्ण करने की चर्चा करते हुए कहा कि देश का यह पहला कृषि शिक्षा का उच्च शिक्षा केन्द्र आज विश्वविद्यालय रूप में कृषि शिक्षा, शोध एवं अनुसंधान के साथ प्रसार शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कृषि शिक्षा में गुणवत्ता के साथ आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए भी आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा कि पानी की कमी के कारण राजस्थान अकाल और सूखे की मार से जूझता रहा है, इन चुनौतियों के बावजूद प्रदेश में कृषि क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में प्रदेश में पांच कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ बड़ी संख्या में कृषि महाविद्यालय खोले गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों को शिक्षण के साथ-साथ शोध पर भी विशेष ध्यान देना होगा तथा यह सुनिश्चित करना होगा कि इन शोध कार्यों का लाभ किसानों को मिले। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में आईएआरआई, काज़री, सीएफटीआरआई जैसे उच्च कोटि के संस्थान स्थापित किए गए जिन्होंने देश में कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है।

कृषि, मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री श्री लालचन्द कटारिया ने कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि आज भी 65 प्रतिशत जनसंख्या की आजीविका कृषि पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों के हित को ध्यान में रखते हुए देश में पहली बार राजस्थान प्रदेश में कृषि बजट अलग से पेश करने का ऐतिहासिक निर्णय किया गया है। उन्होंने अपने सम्बोधन में श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विवि जोबनेर के गौरवशाली अतीत को भी याद किया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारत सरकार के सचिव, डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने कहा कि देश के कृषि विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए कुलपतियों की एक कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कृषि शिक्षा, शोध एवं प्रसार शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए परिषद द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

आरम्भ में श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जीत सिंह सन्धू ने विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक, शिक्षणेत्तर गतिविधियों तथा नवाचारों आदि के बारे में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी।

राज्यपाल ने इस अवसर पर श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय परिसर में तैयार वर्षा जल संग्रहण तालाब का ऑनलाइन लोकार्पण भी किया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय पर आधारित स्मारिका ‘कृषि शिक्षा का ध्रुवतारा’ का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल श्री मिश्र ने उपस्थितजनों को संविधान की उद्देश्यिका और मूल कर्तव्यों का वाचन भी करवाया।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार, प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्द राम जायसवाल, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़, स्वामी केशवनानन्द राजस्थान कृषि विवि बीकानेर के कुलपति डॉ. रक्षपाल सिंह, कृषि विवि जोधपुर के कुलपति डॉ. बी.आर. चौधरी, कृषि विवि कोटा के कुलपति डॉ. दिनेश चन्द्र जोशी एवं राजुवास बीकानेर के कुलपति डॉ. विष्णु शर्मा ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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