Monday , 26 October 2020

ऑनलाइन प्लेटफार्म के माघ्यम से अनवरत जारी रखें शैक्षणिक यात्रा

महाराजा गंगासिंह मेमोरियल व्याख्यानमाला , गांव-ढाणियों में रहने वाले युवा भी उच्च शिक्षा से न रहें वंचित ऑनलाइन प्लेटफार्म के माघ्यम से अनवरत जारी रखें शैक्षणिक यात्रा – राज्यपाल
राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि आने वाले समय में परिस्थितियों के अनुरूप विद्यार्थियों को अध्ययन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए शिक्षक एक ऐसी कार्ययोजना तैयार करें जिससे गांव व ढाणी तक रहने वाला विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। विश्वविद्यालयां से यह अपेक्षा है कि वे ऐसे शोध कार्य करें, जिससे विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र साबित हो और शोध के ऐसे परिणाम आयें जो आमजन के लिए उपयोगी साबित हां। कोविड-19 जैसी विपरीत परिस्थितियों में विश्वविद्यालय ऑनलाईन प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी शैक्षणिक यात्रा को अनवरत जारी रखे। विपरीत परिस्थितियों में विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा सतत् रूप से वैकल्पिक माध्यमों का प्रयोग कर अध्यापन जारी रखना आवश्यक है।
राज्यपाल श्री मिश्र शनिवार को यहां राजभवन में महाराजा गंगा सिंह मेमोरियल व्याख्यानमाला को वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से सम्बोधित कर रहे थे। समारोह का आयोजन बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। राज्यपाल ने संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्त्तव्यों का वाचन भी कराया। राज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक, प्रशासनिक सुधार एवं विकास की गंगा बहाने के लिए महाराजा गंगा सिंह को आधुनिक सुधारवादी एवं भविष्यदृष्टा के रूप में याद किया जाता है। स्वयं सुशिक्षित एवं प्रशंसनीय शिक्षानुरागी महाराजा गंगा सिंह ने विपरीत परिस्थितियों में अनवरत, संघर्षरत रहकर शिक्षा की प्रगति में विशेष रूचि ली। शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाना महाराजा गंगा सिंह का विशेष उद्देश्य रहा। महाराजा गंगा सिंह का ऐसा विश्वास था कि आम नागरिक अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह तभी कर सकते हैं जब उन्हें शिक्षा का अवसर मिले।
राज्यपाल ने कहा कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। संकल्प को मजबूत करते हुए ‘‘आपदा को अवसर’’ के रूप में बदलना होगा। विश्व के सामने भारत एक आशा की किरण के रूप में नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार उस आत्मनिर्भर की बात में ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ के भाव को रखते है। भारत की आत्मनिर्भरता के मूल में संसार के सुख, सहयोग एवं शांति का भाव है, जो जीव मात्र का कल्याण चाहती है तथा पूरे विश्व को परिवार मानती है। देश में शैक्षणिक विकास को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए नवीन शिक्षा नीति-2020 बनाई गई है। मानवीय क्षमताओं को पूर्णता तक ले जाने, समता मूलक समाज निर्माण और राष्ट्रीय विकास का मूल आधार शिक्षा है। समारोह को प्रो. कपिल कपूर, प्रो.
बी एल भादाणी और कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह ने भी सम्बोधित किया।

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