Saturday , 28 November 2020

वैदिक ज्ञान आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने वेद विद्यापीठ के डिजिटल प्लेटफार्म का किया लोकार्पण
वैदिक ज्ञान से वृक्षपूजा, प्रकृति और पर्यावरण प्रेम की अतीत की हमारी धरोहर संरक्षण पर दिया जोर
जनजातीय धरोहर का वैदिक ज्ञान से हो वैज्ञानिक रूप में संरक्षण
वैदिक ज्ञान आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता- राज्यपाल

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने कहा है जनजातीय धरोहर को वैज्ञानिक रूप में संरक्षित करने के लिए वैदिक ज्ञान आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने वेद विद्यापीठ के जरिए प्राचीन भारतीय ज्ञान को वैज्ञानिक रूप में सहेजे जाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि वेद ईश्वर प्रदत्त ऐसा लिखित संविधान है जिसमें जीवन जीने का सर्वोत्तम ढंग बताया गया है। उन्होंने वेद विद्यापीठ के जरिए भारतीय संस्कृति की इस अनुपम धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है।

श्री मिश्र आज यहां राजभवन से बांसवाड़ा स्थित गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय में वेद विद्यापीठ के डिजिटल प्लेटफार्म के लोकार्पण बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि पूरे भारत में अकेले बांसवाड़ा में ही ऋग्वेद की शांखयान शाखा की ऋचाओं के सस्वर गान करने वाले ज्ञाता हैं, वेद विद्यापीठ की स्थापना से उनके संरक्षण और सामवेद मंत्रों की गायन परम्परा को सहेजे जाने का भी महत्वपूर्ण कार्य हो सकेगा।

कुलाधिपति ने कहा कि बांसवाड़ा क्षेत्र में वेद विद्यापीठ की स्थापना के साथ ही जनजाति समाज की वृक्षपूजा, प्रकृति और पर्यावरण प्रेम की अतीत की हमारी धरोहर को संरक्षित और सुरक्षित करने का कार्य भी विशेष रूप से किया जाए। वेद विद्यापीठ की स्थापना के अन्तर्गत उन्होंने सनातन भारतीय परम्पराओं को आधुनिक विकास के साथ सहेजने पर भी जोर दिया।

राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति को वेद संस्कृति बताते हुए कहा कि जीवन से मृत्युपर्यन्त तक के सभी सोलह संस्कार वेदों में बताए गए हैं। उन्होंने वेदों में वर्णित संस्कार विधि के अनुसार कार्य करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे व्यक्ति का सर्वांगीण विकास हो सकता है। वेद विद्यापीठ को नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता की उदात्त भावना का विकास इनके जरिए किया जा सकता है।

श्री मिश्र ने कहा कि प्राचीन ऋषियों ने तपोबल के द्वारा जो अनुभूतिजन्य ज्ञान प्राप्त किया, उसे पीढ़ी दर पीढ़ी वेदों के जरिए ही पहुंचाया गया है। इसीलिए वेद अनादि, अनन्त और सनातन श्रुति ज्ञान हैं। आदि शंकाराचार्य द्वारा वेदों के भाष्य लिखे जाने और वेदांे के जरिए भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्तर पर प्रसार किए जाने की चर्चा करते हुए उन्होंने शंकर के अद्वैत दर्शन और अनेकता में एकता की भारतीय संस्कृति को आज भी प्रासंगिक बताया।

इस अवसर पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मिश्र ने वेद विद्यापीठ की विद्वत चर्चा श्रृंखला ‘सारस्वत’ के शुभारम्भ की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेद विज्ञान से जुड़े विविध आयामों पर होने वाली चर्चा का जनहित में सार्वजनिकरण करने के भी प्रयास किए जाएं।

इससे पहले ऑनलाइन लोकार्पण समारोह में वेद विज्ञों द्वारा वेद मंत्रों का स-स्वर मंगलाचरण किया गया। गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आई.वी. त्रिवेदी ने कहा कि बांसवाड़ा में वेद विद्यापीठ की स्थापना का लाभ डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर आदि जनजातीय क्षेत्रांें को भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि वेद विद्यापीठ विश्वविद्यालय का शोध एवं अकादमिक प्रकल्प है। इसके लिए शहर के निकट 25 बीघा भूमि आंवटित हो चुकी है तथा जल्द ही इस पर भवन निर्माण के लिए भी कार्यवाही की जाएगी। वेद विद्यापीठ के सचिव श्री विशेष पंड्या ने इसकी भावी रूपरेखा बताते हुए सभी का आभार जताया। ऑनलाइन समारोह में राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार ने वेद विद्यापीठ को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्द राम जायसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रसार में यह महत्ती कदम है।

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