Thursday , 24 September 2020

राजस्थान का सतत,समग्र व संतुलित विकास हो

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि राजस्थान का सतत, समग्र व संतुलित विकास होना चाहिए। इसके लिए प्रदेश में कौशल विकास, जन स्वास्थ्य, अनुसूचित जनजाति कल्याण, विधिक साक्षरता, उच्च शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में कार्य करने के लिए रणनीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करना होगा ताकि वे पढ़-लिख कर अपने गांवों में ही अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सके।

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र शनिवार को यहां राजभवन में राज्यपाल सलाहकार मंडल की पहली बैठक को आॅनलाइन सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने राज्य के समग्र विकास से संबधित प्रकरणों पर समय-समय पर परामर्श लेने हेतु विगत 23 जुलाई को राज्यपाल सलाहकार मंडल का गठन किया। इस मंडल के अध्यक्ष राज्यपाल श्री कलराज मिश्र होंगे। मंडल में विभिन्न क्षेत्रों के सात विषय विशेषज्ञों को सदस्य बनाया गया है। सदस्यों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकारी डाॅ. विश्वपति त्रिवेदी व डाॅ. राकेश कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आर.एन. माथुर, पूर्व कुलपति प्रो. ए.के.गहलोत, सामाजिक उद्यमिता विशेषज्ञ श्री विवेक सिंह, अर्थशास्त्री डाॅ. मनोरंजन शर्मा और मानव उत्पादकता क्षेत्र के विशेषज्ञ श्री टी. मुरलीधरन शामिल है। मंडल के सदस्य सचिव राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार होंगे।

राज्यपाल श्री मिश्र ने बताया कि यह सलाहकार मंडल उन्हें उच्च शिक्षा, विधि, प्रशासन, उद्योग, अर्थशास्त्र, सामाजिक उद्यम, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र विकास, पर्यटन, कला व संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, अभाव अभियोग निराकरण, कानून एवं व्यवस्था, रोजगार सृजन, जल संरक्षण, पावर एवं सौर ऊर्जा क्षेत्र व सैनिक कल्याण जैसे विषयों पर परामर्श देगा। श्री मिश्र ने बताया कि यह मंडल विशेष रूप से समाजिक सेवाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी बढ़ाने के साधनों के संबध में भी परामर्श देगा। इन विशेषज्ञों और शासन के साथ बैठकर योजनाओं को प्रदेश में धरातल पर लाने के लिए विचार विमर्श किया जायेगा।

राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि पहली बैठक परिचयात्मक रही। सभी सदस्यों से वीडियों कान्फ्रेन्स के माध्यम से विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि इस सलाहकार मंडल की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित होगी और सभी सदस्य अवैतनिक रूप से कार्य करेंगे। राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वयन करना होगा। इसके लिए एक रोडमैप तैयार कर कार्य आरम्भ किया जायेगा ताकि प्रदेश का सतत्, संतुलित व चहुंमुखी विकास हो सके।

राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान का लगभग साठ प्रतिशत भू-भाग जटिल भौगोलिक परिस्थितियों वाला है। यहां रोजगार की व्यापक समस्या है, जिसके समाधान के लिए वोकल फाॅर लोकल को प्रोत्साहित करना होगा और लोकल को ग्लोबल बनाने के प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की आधारभूत संरचना, उपकरण व दवाइयों की उपलब्धता को ग्रामीण स्तर तक सुनिश्चित करना होगा।

राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 (1) एवं अनुसूची 5 के तहत राज्य के राज्यपालों को विशेष शक्तियां प्रदत्त हंै। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 33 जिलो में से 8 जिले जनजाति बाहुल्य हैं। इन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के लोगों की सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक  स्थिति अत्यन्त दयनीय है। अनुसूचित क्षेत्र में निवासरत अनुसूचित जनजातियों के लोगों के समग्र विकास की राज्यपाल पर सैंवधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए इन क्षेत्रों के लोगों के लिए ढ़ांचागत सुविधाओं के विकास और सुदृढ़ीकरण हेतु कार्यों को गति देने के प्रयास किये जायेगे।

राज्यपाल ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के वाबजूद राज्य में महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता बहुतायात में है। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की आवश्यकता है ताकि प्रदेश का तीव्र आर्थिक विकास हो सके। बैठक में विषय विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषयों के क्षेत्रों में राज्य में किये जाने वाले कार्यों के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार ने राज्यपाल सलाहकार मंडल के सभी सदस्यों का स्वागत किया और बैठक में भाग लेने के लिए आभार भी व्यक्त किया। बैठक का संचालन राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्दराम जायसवाल ने किया। राजभवन के जनजाति प्रकोष्ठ की निदेशक डाॅ. कविता सिंह भी बैठक में मौजूद थीं।

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