Sunday , 20 September 2020

संविधान प्रजातांत्रिक मूल्यों की आत्मा हैं

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि संविधान प्रजातांत्रिक मूल्यों की आत्मा है। उन्होंने कहा है कि नियमानुसार सदन आहूत करने में काई आपत्ति नही है।
क्या कहता है अनुच्छेद 174 – The Governor shall from time to time summon the House or each House of the Legislature of the State to meet at such time and place as he thinks fit, but six months shall not intervene between its last sitting in one session and the date appointed for its first sitting in the next session
संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के अन्तर्गत माननीय राज्यपाल साधारण परिस्थिति में मंत्रिमण्डल की सलाह के अनुरूप ही कार्य करेंगे तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(1) की पालना हेतु भी मंत्रिमण्डल की सलाह से बाध्य है, परन्तु यदि परिस्थितियाँ विशेष हो, ऐसी स्थिति में माननीय राज्यपाल यह सुनिश्चित करेंगे कि विधानसभा का सत्र संविधान की भावना के अनुरूप आहूत किया जाये तथा विधानसभा के सभी माननीय सदस्यों को उपस्थिति हेतु उचित समय एवं उचित सुरक्षा एवं उनकी मुक्त एवं स्वतंत्र इच्छा, स्वतंत्र आवागमन, सदन की कार्यवाही में भाग लेने हेतु प्रक्रिया को अपनाया जावे।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में यह कहीं भी नहीं कहा गया है कि माननीय राज्यपाल को किसी नियम के मूल प्राविधान से हटकर किये जाने वाले कार्य को जानने का अधिकार भी नहीं है। नबाम राबिया में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के प्रस्तर 150 (एच) में निमन्वत उल्लेख है:-

Article 163 does not give the Governor a general discretionary power to act against or without the advice of his Council of Ministers. The area for the exercise of his discretion is limited. Even in this limited area, his choice of action should not be arbitrary or fanciful. It must be a choice dictated by reason, actuated by good faith and tempered by caution. माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा प्रकरण में सकारण, सद्भावना तथा सावधानी के आधार पर निर्णय लिया गया है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य –
1. कोरोना जनित कोविड-19 वैश्विक महामारी का प्रकोप है, राज्य में पिछले एक माह में ऐक्टिव केस की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ गई है, ऐसे में बिना कोई विशेष परिस्थिति में अकारण 1200 से अधिक लोगों का जीवन खतरे में क्यों डाला जाये।
2. विधानसभा के सदस्यगण राज्य में और राज्य से बाहर अलग-अलग स्थानों पर बाड़ेबंदी में होटलों में बन्द है, ऐसे में उनकी विधानसभा में उपस्थिति एवं उनका स्वतंत्र रूप से कार्य संपादन, स्वतंत्र इच्छा एवं स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित करना राज्यपाल का संवैधानिक कर्तव्य है।
3. सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप यदि किसी परिस्थिति में विधानसभा का सत्र बुलाना हो तो 21 दिन का नोटिस दिया जाना आज्ञापक है और यदि कोई विशेष कारण है, तो राज्य सरकार कारण का उल्लेख करें।
पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा का पंचम सत्र आहूत करने के लिए पत्रावली सर्वप्रथम दिनांक 23 जुलाई, 2020 की रात्रि 07.30 बजे राजभवन को प्राप्त हुई। चूंकि वर्तमान में राज्य में राजनैतिक तौर पर विशेष परिस्थितियां हैं इसलिए इस पर विधिक राय प्राप्त की गई। पत्रावली के साथ जो मंत्रिमण्डल की आज्ञा प्राप्त हुई, उसमे मंत्रिमण्डल द्वारा सत्र को बुलाने हेतु न तो निर्णय का अनुमोदन किया गया, न ही तिथि का उल्लेख किया गया, इसलिए यह प्रस्ताव मंत्रिमण्डल की सलाह की श्रेणी में नहीं माना जा सकता था। इसमे सत्र का प्रस्तावित एजेण्डा एवं अल्प अवधि का सत्र आहूत करने का औचित्य भी नही था। न ही सत्र आहूत करने के लिए किसी तिथि का उल्लेख किया गया। पूर्व निर्धारित प्रक्रिया से भिन्न प्रक्रिया अपनाकर अनावश्यक तत्परता दिखाये जाने का कोई औचित्य नहीं था, इसलिए कतिपय बिन्दुओं पर परामर्श देते हुए सम्पूर्ण स्थिति स्पष्ट करने हेतु पत्रावली वापस भेजी गई।
राज्यपाल के द्वारा प्रदत्त परामर्श के अनुरूप प्रक्रियागत सुधार के साथ राज्य सरकार का पुनः प्रस्ताव राजभवन को 25 जुलाई की रात्रि को प्राप्त हुआ। जिसमें राज्य सरकार द्वारा 31 जुलाई से सत्राहूत करने का प्रस्ताव भेजा गया है। राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में यह वर्णित किया है कि राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 में मंत्रिमण्डल की सलाह मानने को बाध्य है एवं राज्यपाल स्वयं के विवेक से कोई निर्णय नहीं ले सकते है। परन्तु राज्य सरकार द्वारा राज्यपाल द्वारा चाही गई किसी सूचना का प्रति उत्तर नहीं दिया गया वरन राज्यपाल के अधिकारों की सीमाओं का उल्लेख किया गया।
राज्यपाल ने कहा है कि चूंकि वर्तमान में परिस्थितियाँ असाधारण है, इसलिए राज्य सरकार को तीन बिन्दुओं पर कार्यवाही किये जाने का परामर्श देते हुए पत्रावली पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये है-
(1) विधानसभा का सत्र 21 दिन का क्लीयर नोटिस देकर बुलाया जाये, जिससे अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत प्राप्त मौलिक अधिकारों की मूल भावना के अन्तर्गत सभी को समान अवसर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
(2) यदि किसी भी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की सत्र में कार्यवाही की जाती है, तो वह कार्यवाही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पारित आदेशों के अनुरूप ही किया जाए तथा उसमें सभी सदस्यों की भागीदारी उनकी स्वतंत्र इच्छा से सुनिश्चित की जाये।
(3) कोरोना महामारी के संबंध में जारी दिशा निर्देशों की पालना हेतु यह भी स्पष्ट किया जाये कि विधानसभा के सत्र के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किस प्रकार किया जाएगा।

तदुपरांत राज्य सरकार ने दिनांक 28.07.2020 को पत्रावली राजभवन को पुनः भेजी गई परन्तु सरकार द्वारा माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा पूर्व में मांगी गई जानकारी का कोई भी स्पष्ट एवं सकारण उत्तर नहीं दिया।
राज्यपाल द्वारा यह अपेक्षा की गई थी कि विधानसभा के सत्र को अल्पावधि के नोटिस पर बुलाने का कोई युक्तियुक्त एवं तर्कसंगत कारण यदि है, तो उसे सूचित किया जाये। चूंकि विधानसभा में सभी सदस्यों की स्वतन्त्र उपस्थिति एवं उनका स्वतन्त्र रूप से कार्य संपादन सुनिश्चित करना राज्यपाल का संवैधानिक कर्तव्य है, इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष सहित विधानसभा के 17 विधायकों द्वारा भी एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। परन्तु राज्य सरकार की ओर से कारण बताने के स्थान पर यह उल्लेखित किया जा रहा है कि राज्यपाल मंत्रिमण्डल के निर्णय को मानने के लिए बाध्य है एवं निर्णय किस कारण से लिया गया है यह जानने का उनको अधिकार नहीं है।
इसके साथ ही राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियमावली के नियम संख्या 3 के परन्तुक का भी बार-बार उल्लेख किया गया है, जबकि नियम संख्या 3(1) इस अवधारणा पर आधारित है कि विधानसभा का सत्र बुला लिया गया है तथा उसके पश्चात् माननीय सदस्यों को आमंत्रण देने के लिए विधानसभा के सचिव प्रत्येक सदस्य को विधानसभा की बैठक के दिनांक, समय, स्थान जो माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा नियत किया गया हो, का नोटिफिकेशन जारी करवायेगें। नियम 3(2) के अन्तर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि सामान्यतः प्रत्येक सदस्य को उपरोक्त नियत तारीख, समय एवं स्थान की सूचना 21 दिन के नोटिस पर दी जायेगी। यह नियम सत्र आहूत होने की आज्ञा जारी होने के बाद केवल सत्र की व्यवस्था और सबको सूचना के लिए ही लागू होगा।
राज्य सरकार ने सामान्य नियम से हटकर यदि विधानसभा सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, तो वह निर्णय किन विकट एवं विषम परिस्थितियों में लिया गया है एवं साथ ही प्रजातान्त्रिक मूल्यों की पालना आवश्यक है। इसलिए पत्रावली को पुनः प्रेषित कर यह निर्देशित किया गया है कि अल्प अवधि के नोटिस सत्र आहूत करने का क्या ठोस कारण है, इसे स्पष्ट किया जाय तथा यह भी स्पष्ट किया जाए कि वर्तमान असामान्य एवं विषम परिस्थिति में अल्प अवधि के नोटिस पर सत्र क्यों बुलाया जा रहा है।
यह भी उल्लेखनीय है कि यदि इस सत्र में राज्य सरकार को विश्वास मत हासिल करना है तो सामाजिक दूरी के साथ अल्प कालीन सत्र बुलाया जाना संभव है, जो कि अल्पसूचना पर सत्र बुलाये जाने का युक्तियुक्त कारण हो सकता है।
उपरोक्त परिस्थिति में उचित होगा कि राज्य सरकार वर्षाकालीन सत्र जैसे नियमित सत्र को 21 दिन के नोटिस पर बुलाये।

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