Saturday , 22 July 2017
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नए आर्थिक परिप्रेक्ष्य में एक संतुलित और विकासोन्मुख बजट 2015-16

सन 1990 के बाद वैश्वीकरण के युग के पश्चात देश के वार्षिक बजट में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। जहां 1990-91 में केंद्र सरकार का खर्च जीडीपी का कुल 17 प्रतिशत हुआ करता था और सरकार विभिन्न वर्ग, समूहों को राहत देने के उद्देश्य से सब्सिडी का भारी बोझ रहा करता था परन्तु अब सरकारी खर्च और सब्सिडी पर लगातार कटौती की जा रही है। वर्ष 2013-14 में
सरकारी खर्च जीडीपी का 13.7 प्रतिशत था, एनडीए सरकार ने वर्ष 2014-15 में इसे जीडीपी का 13.3 प्रतिशत रखा और इस वर्ष के बजट में यह जीडीपी का 12.6 प्रतिशत रखा गया है। फिस्कल डिफीसिट पिछले वित्तीय वर्ष के 3.6 प्रतिशत के मुकाबले 3.1 प्रतिशत अनुमानित किया गया है। देश के फेडरल स्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान करने के लिए टैक्स रेवन्यू में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत की गई है। इससे सरकारी खजाने पर बढ़ते हुए बोझ से निपटने हेतु सर्विस टैक्स में वृद्धि की गई है। यह
वृद्धि मूल रूप में टैक्स रेवन्यू में राज्यों की भागेदारी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। सरकार इन उपायों से भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है और अगले वर्ष देश की आर्थिक विकास दर का लक्ष्य 8.1 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत के बीच रहने का है। व्यवसायी जगत आज की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा
है। सरकार ने बजट 2015-16 में कारपोरेट टैक्स 30 फीसदी से 25 फीसदी कर दिया है। इसे चरणबद्ध तरीके से चार वर्षों में लागू किया जाएगा। साथ ही कारपोरेट जगत को मिलने
वाली सभी छूटों को समाप्त कर दिया गया है। कारपोरेट टैक्स जो पहले 30 प्रतिशत था परन्तु विभिन्न कानूनों के तहत दी जाने वाली छूटों के पश्चात यह लगभग 23 प्रतिशत बैठता था। सरकार ने यह आश्वस्त किया है कि सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया दो दिन में पूरी होगी। यद्यपि यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह कारपोरेट परस्त बजट है जबकि ऐसा नहीं है। विगत कुछ वर्षों में यह देखा गया है 30 प्रतिशत कारपोरेट टैक्स के बावजूद वास्तविक कलेक्शन 23 प्रितशत से ज्यादा नहीं होता था ऐसे में 25 प्रतिशत कारपोरेट टैक्स को ग्राउंड रियलटी पर ले आना एक विवेकपूर्ण कदम है। पूरी संभावना है कि टैक्स में कमी से लाभान्वित कंपनियां ठंडे बिस्तर में पड़ी विस्तार योजनाओं पर नए सिरे से काम करेंगी, जिससे नई नौकरियां पैदा होंगी। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 70 हजार करोड़ रुपए का फंड उत्साहवर्द्धक है।
टैक्स फ्री इंफ्रास्ट्रक्चर बांड रेल, सड़क और सिंचाई सेक्टर में ग्रोथ ले आएंगे। `प्लग एंड प्ले’ यानि ठेका देने से पहले सारी मंजूरियां देकर तत्काल शुरू किए जाने वाले पांच नए मेगा पावर प्रोजेक्ट्स इन्हीं बुनियादी प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाएंगे। सरकारी अड़चनों से दुविधा में रहने वाली निजी कंपनियां अब इन प्रोजेक्ट्स में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेंगी। सरकार ने रोड ट्रांसपोर्ट पर काफी जोर दिया है और इसके लिए 45,751 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। प्रधानमंत्री सड़क ग्रामीण योजना के लिए 4134 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सरकार बजट में ब्लैकमनी को लेकर काफी गंभीर है। एक लाख से ज्यादा ट्रांजेक्शन पर पैन जरूरी होगा। यदि किसी भारतीय का विदेशी बैंकों में खाता है या विदेशों में उसकी सम्पत्ति है तो उसे रिटर्न भरते समय उसकी जानकारी देनी होगी अन्यथा ब्लैकमनी पाए जाने पर टैक्स चोरी के लिए 300 प्रतिशत
जुर्माना लगेगा और साथ ही साथ 10 साल जेल की सजा भी होगी। ब्लैकमनी पर विशेष जांच के लिए एसआईटी को अपने बुनियादी ढांचे में विस्तार हेतु वर्ष 2015-16 के लिए 45.39 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए ऐसा रोडमैप तैयार किया है जिससे आने वाले समय में किसानों को लाभ मिलेगा। सोशल हेल्थ कार्ड स्कीम, परंपरागत कृषि विकास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना के लिए फंड की व्यवस्था की है। साथ ही साथ नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट बनाने का ऐलान किया है जिससे किसानों को अपनी पैदावार बेचने के लिए मजबूत प्लेटफार्म मिलेगा और उन्हें अपनी उपज का अच्छा रेट मिलेगा। बजट में छोटी अवधि के लिए कोआपरेटिव रूरल केडिट रिफाइनेंस फंड के तहत 45 हजार करोड़ रुपए का
प्रावधान किया है। किसानों को लोन देने हेतु साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। ग्रामीण ढांचागत विकास के लिए 25 हजार करोड़ रुपए और सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए 5300
करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे कृषि का विकास सुनिश्चित हो। सरकार ने दुनियाभर से आने वाली वर्किंग फोर्स को ध्यान में रखते हुए शिक्षित और स्किल्ड वर्प फोर्स तैयार करने के लिए, स्किल्ड इंडिया अवधारणा के तहत शिक्षा और रोजगार को एक दूसरे से जोड़ते हुए देश में मौजूद 54 प्रतिशत आबादी जो 25 वर्ष से कम की है को ध्यान में रखकर विशेष योजना तैयार की है। दीनदयाल ग्रामीण कौशल योजना के तहत 1500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। आर्थिक तंगी के कारण हायर एजुकेशन से वंचित रह जाने वाले स्टूडेंट्स की वित्तीय सहायता
के लिए आईटी बेस्ड फाइनेंशियल एंड अथारिटी स्थापित करने का ऐलान किया है। सरकार ने एजुकेशन खासकर हायर एजुकेशन को लेकर देश में फैली असमानता को ध्यान में रखते हुए कई
राज्यों में प्रीमियर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट देने का फैसला किया है। इसमें जम्मूकश्मीर से लेकर नागालैंड जैसे दूरदराज के क्षेत्रों को ध्यान में रखा गया है। एम्स जैसे संस्थान पंजाब, तमिलनाडु, जम्मूकश्मीर, हिमाचल और असम में दिए हैं। जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक को आईआईटी तथा आंध्र प्रदेश में आईआरईएम खोलने की घोषणा की है। सरकार का लक्ष्य 2022 तक हर पांच किलोमीटर के दायरे में एक सीनियर सैकेंडरी स्कूल साथ ही साथ 80 हजार मिडिल स्कूल और 75 हजार प्राथमिक स्कूलों को अपग्रेड करना है। अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को शिक्षा और रोजगार हेतु नई मंजिल योजना प्रारंभ की जाएगी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को 3,738 करोड़ रुपए का बजट प्रस्ताव है। रक्षा बजट में इस वर्ष मेक इन इंडिया पर फोकस किया
गया है। त्वरित और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर सरकार ने जोर दिया है। इस वर्ष रक्षा बजट में की गई बढ़ोतरी अधिकांश राजस्व मद में है। इसमें से 152,139 करोड़ का खर्च वेतन और सामान्य खर्च पर होगा। सैनिक साजोसामान की खरीद के लिए पूंजीगत प्रावधान के तहत 94588 करोड़ का प्रावधान किया गया है। रक्षा साजो
सामान की खरीद के स्थान पर आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है ताकि सेनाओं को वक्त से पहले हथियार मिल सकें। हथियारों के सबसे बड़े आयातक होने का लाभ उठाते हुए सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया है। जिससे भारत को सबसे बड़े उत्पादन केंद्र के तौर पर विकसित किया जा सके और इस सेक्टर को प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया का मुख्य क्षेत्र बनाया जा सके। अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों को कम करने और तुरन्त न्याय मुहैया कराने के उद्देश्य से मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के लिए 4564 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। जो मौजूदा प्रावधान से 50 प्रतिशत अधिक है। फैमिली कोर्ट से लेकर नेशनल मिशन फॉर जस्टिस डिलीवरी और लीगल रिफार्म का विशेष ध्यान
रखा गया है। एमएसएमई सेक्टर देश के सामाजिक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 1991 के बाद के आर्थिक उदारवाद के पश्चात इस सेक्टर का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो गया है। आज एमएसएमई क्षेत्र का निर्यात में हिस्सा 40 प्रतिशत तथा विनिर्माण 45 प्रतिशत है और सकल घरेलू उत्पाद में योगदान आठ प्रतिशत है। एमएसएमई क्षेत्र में उद्यमों/ट्रेडों की कुल संख्या लगभग चार करोड़ है। जिसमें 15.64 लाख पंजीकृत उद्यम हैं। इस वर्ष रोजगार सृजन के क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाए गए और 3,94,669 युवा लाभान्वित हुए। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 17073 उद्यम स्थापित किए गए और 129380 युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए गए। चालू वित्तीय वर्ष में देश के विभिन्न भागों में 29 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया और इस सेक्टर के अंतर्गत 8588 से अधिक युवाओं को रोजगार प्राप्त हुए। प्रौद्योगिकी विकास केंद्रों ने 103867 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें उद्यमिता के लिए तैयार किया गया। एमएसएमई क्षेत्र में चल रहे उद्यमों का ग्रोथ ओरिएंटेशन बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसा फोकस क्षेत्र है जो उद्यमों का उत्पादक व प्रतिस्पर्धा बनाए रखता है। एमएसएमई क्षेत्र में लगभग 5.77 करोड़ से अधिक उद्यम एवं सेवा क्षेत्रों में हैं जिनमें लगभग 62 प्रतिशत एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के हैं। इस बजट में इन्हें सहज तरीके से ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 20 हजार करोड़ रुपए के बजट से मुद्रा बैंक की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त एससी/एसटी/ओबीसी स्टार्ट्स को सुविधा प्रदान करने हेतु 3000 करोड़ रुपए की केडिट गारंटी स्कीम प्रारंभ की गई है। नावेन्मेष को प्रोत्साहित करने के लिए नीति आयोग के अंतर्गत `अटल नवाचार मिशन’ स्थापित करने तथा एक स्वरोजगार और प्रतिभा का सदुपयोग करने हेतु एक सेतु तंत्र स्थापित किया गया है। अटल नवाचार मिशन एक नवाचार संवर्धन मंच होगा। यह सेतु तंत्र एक औद्योगिक वित्तीय पहल होगी तथा स्वरोजगार के क्रियाकलापों, विशेषकर प्रौद्योगिकी प्रेरित क्षेत्रों में व्यवसाय चलाने के सभी पहलुओं में मदद के लिए एक सहायता कार्यक्रम होगा। इस प्रायोजन हेतु नीति आयोग ने रंभिक रूप से 1000 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। इसके अतिरिक्त इनोवेशन और रिसर्च पर काफी फोकस किया गया है। अनुसंधान विकास के लिए वर्ष 2015-16 हेतु 150 करोड़ रुपए का प्रावधान
किया गया है। किसानों, गरीबों, भूमिहीनों व वंचितों का सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना के अंतर्गत 12 रुपए वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपए का दुर्घटना बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है। यानि एक रुपए प्रतिमाह के प्रीमियम पर दो लाख रुपए की दुर्घटना बीमा दी गई है। अटल पेंशन योजना के अंतर्गत जनधन योजना में 31 दिसम्बर से पूर्व खुले खातों पर सरकार पांच साल तक 50 फीसदी योगदान करेगी। मनरेगा में मिलने वाले
पैसे को लाभार्थियों के जनधन खाते में सीधा जमा करा दिया जाएगा। महिला सुरक्षा के लिए सरकार कृतसंकल्प है। महिला सुरक्षा के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने 1000 रुपए का निर्भया फंड स्थापित किया है। वास्तव में बजट 2015-16 एक
स्पष्ट दृष्टि वाला बजट है। यह प्रगतिवादी सकारात्मक, व्यावहारिक व विवेकपूर्ण बजट है। इसमें किसानों के लिए अनेक सुविधाओं की घोषणा की गई है। गरीबों, दलितों व महिलाओं की सुरक्षा व कल्याण हेतु व्यापक प्रबंध किए गए हैं। युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार, वृद्धों के लिए पेंशन व बीमा का प्रावधान कर उनका जीवन सुरक्षित व समृद्ध बनाने का प्रयास किया गया है। साथ ही साथ उद्यमियों और इन्वेस्टर्स के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने हेतु विभिन्न कदम उठाए गए हैं। बुनियादी दृष्टिकोण से यह बहुत कारगर बजट है, इसमें बुनियादी दृष्टिकोण को विकास में तब्दील करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल मिलाकर इस बजट को दूरगामी, सकारात्मक, सभी के हिताय कहा जा सकता है। यह बजट अटल जी सुशासन व राष्ट्र निर्माण के स्वप्न को चरितार्थ करता है वहीं यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन का रोडमैप है जो सबका साथ सबका विकास सुनिश्चित करेगा और भारत में आर्थिक विकास की रफ्तार को नया आयाम देगा।

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