Wednesday , 24 February 2021

प्रतिभाओं को अवसर देने से ही समाज का होता है सर्वांगीण विकास

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि जिस समाज में प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर मिलते हैं, वही समाज तेजी से आगे बढ़ता है और नया इतिहास गढ़ता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के गौरव को बचाए रखने की जिम्मेदारी युवाआंे पर है। उन्होंने प्रतिभाओं का पोषण कर उन्हें प्रोत्साहन देने का आह्वान किया ताकि आने वाली पीढ़ी उनका अनुकरण कर भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्राप्त कर सके।
राज्यपाल श्री मिश्र संस्कृति युवा संस्था द्वारा आयोजित राजस्थान गौरव अलंकरण समारोह में रविवार को यहां राजभवन से वर्चुअल सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने गौ, गंगा, गीता और गायत्री को भारतीय संस्कृति के प्रमुख स्तम्भ बताते हुए कहा कि गौसेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, गंगा हमें सभी विकारों से दूर रहकर जीवन जीने का संदेश देती है, गीता से बड़ा कर्म का कोई संदेश नहीं है और गायत्री मंत्र जीवन के उजास का संवाहक है। उन्हांेने कहा कि इन्हीं चार प्रमुख स्तम्भों पर भारतीय संस्कृति आज भी शाश्वत टिकी हुई है।
राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि राजस्थान का गौरवमयी इतिहास, किले और महल, स्थापत्य सौंदर्य, शिल्प, मेले और त्योहार उत्सवधर्मिता का अनूठा उजास लिए हैं। यहां की कला, साहित्य और सांस्कृतिक पृष्ठ भूमि विश्व भर में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्हांेने इस अवसर पर राजस्थान गौरव अलंकरण से सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई एवं शुभकामना भी दी।
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा कि अठारह पुराण और सभी धर्म ग्रन्थों का एक ही सार है कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है और दूसरों को पीड़ा पहुंचाने से बड़ा कोई पाप नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ भारतीय संस्कृति का मूल विचार है और अशिक्षा, बेरोजगारी, भेदभाव सहित सभी कुरीतियों को दूर कर मानवता के हित में सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए।
संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने अपने सम्बोधन में संस्था के क्रियाकलापों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के आरम्भ में राज्यपाल श्री मिश्र ने संविधान की उद्देश्यिका तथा मूल कत्र्तव्यों का वाचन करवाया।
इस अवसर पर राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति श्री गोवर्धन लाल बाढ़धार, संस्कृति युवा संस्था के संरक्षक श्री एच.सी. गणेशिया, कार्यकारी अध्यक्ष चित्रा गोयल सहित प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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