Wednesday , 24 February 2021

पाठ्यक्रम और प्रसार सामग्री हिन्दी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में भी हों तैयार

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने कृषि शिक्षा के बने बनाये ढर्रे को बदलने पर जोर देते हुए कृषि शिक्षा को आधुनिक समय के अनुरूप करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए ऐसे प्रबंध तंत्र को विकसित करने की जरूरत है जिसके तहत युवा केवल राजकीय सेवाओं में जाने की सोच की बजाय कृषि संबंधित कार्यों, उद्यमों और खेती-बाड़ी का कार्य करने के प्रति उत्सुक और लालायित रहें।

श्री मिश्र सोमवार को कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के ऑनलाइन दीक्षांत समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खेतों में जो किसान कार्य करते हैं, उनके पास खेती-बाड़ी से संबंधित पुरखों का संजोया बेहद महत्वपूर्ण ज्ञान है। ऐसे ज्ञान को विश्वविद्यालयों की प्रसार शिक्षा के अंतर्गत संग्रहित कर प्रकाशित-प्रसारित करने की जरूरत है।

उन्होंने किसानों को खेतों के असली वैज्ञानिक बताते हुए भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उनके अनुभवों, अधिक पैदावार के लिए किए जाने वाले उपायों, उन्नत किस्म के बीजों से सम्बंधित ज्ञान और कम पानी में अधिक उपज आदि के पारम्परिक ज्ञान को संजोने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांवों में खेतों पर जाएंगे तो अभी भी बड़े बुजुर्ग ऐसे-ऐसे तरीके विद्यार्थियों को बता सकते हैं जिनसे खेती को और अधिक उन्नत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे तरीकों में आधुनिक विज्ञान को जोड़ते हुए भविष्य के पाठ्यक्रम और प्रसार सामग्री हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किए जाने की भी जरूरत है।
श्री मिश्र ने विश्वविद्यालय द्वारा जैविक खेती को प्रोत्साहित करते हुए इस दिशा में और अधिक नवाचार करने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर किसान पोर्टल शुरू करने और विश्वविद्यालय में फसलों की जरूरत के अनुरूप जल उपयोग हेतु कम्प्यूटरीकृत सेंसर आधारित स्वचालित सिंचाई प्रणाली स्थापित किये जाने की सराहना की।

राज्यपाल श्री मिश्र ने युवाओं का आह्वान किया कि वे इस तरह के नये स्टार्ट-अप्स विकसित करें जिनसे पश्चिमी राजस्थान में उपलब्ध कृषि उत्पादों का समुचित व्यवसायिकरण किया जा सके। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर बहु-संकाय विश्वविद्यालय के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायेगा।

मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक समय ऐसा था जब किसान खेती के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर था, लेकिन इन्दिरा गांधी नहर परियोजना से गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, हनुमानगढ़ जैसे जिलों का बड़ा मरूस्थलीय भू-भाग आज उपजाऊ कृषि भूमि में परिवर्तित हो गया है। हरित क्रांति के सूत्रपात के बाद देश के किसान ने अपनी मेहनत से देश को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। मुख्यमंत्री ने कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने और कृषि को तकनीक के साथ जोड़ते हुए कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली तथा मिट्टी की गुणवत्ता के अनुरूप फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राज्यपाल श्री मिश्र के प्रयासों से प्रदेश के विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोहों का आयोजन नियमित तौर पर प्रारंभ हो गया है।

कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौर में कृषि ही एक मात्र क्षेत्र रहा जिसने देश के सकल घरेलू उत्पादन को मजबूती दी। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार नवाचार आधारित प्रगतिशील कृषि को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि के पुरजोर प्रयास कर रही है।

भारत सरकार में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक श्री त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि कम वर्षा के कारण राजस्थान में खेती के लिए कठिन परिस्थिति है, फिर भी सरसो, बाजरा, धनिया जैसी फसलों के उत्पादन में प्रदेश प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कृषि उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए परिषद द्वारा स्ट्रेटजी डाॅक्यूमेन्ट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इजराइल और मिस्र शुष्क भूमि होने के बाद भी कृषि क्रांति लाने में सक्षम रहे हैं, उसी प्रकार राजस्थान भी भूजल का अत्यधिक दोहन किये बिना समेकित कृषि और तकनीक को अपना कर कृषि क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव ला सकता है।

कुलपति श्री बी.आर. चैधरी ने अपने स्वागत उद्बोधन में प्रगति-वृत्त प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा अर्जित उपलब्धियों की चर्चा की। कुलसचिव श्री अरूण कुमार पुरोहित ने दीक्षांत समारोह के समापन पर धन्यवाद ज्ञापित किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान कृषि संकाय के स्नातक एवं निष्णात परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किये गए।

कार्यक्रम के आरम्भ में राज्यपाल श्री मिश्र ने संविधान की उद्देश्यिका तथा मूल कत्र्तव्यों का वाचन भी करवाया।
समारोह के दौरान राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार, प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्दराम जायसवाल सहित अधिकारीगण, शिक्षकगण, शोधार्थी तथा विद्यार्थी आॅनलाइन उपस्थित थे।

Check Also

सोच-समझ और कल्पना शक्ति का विकास करने वाली शिक्षा प्रदान करें

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि सर्वांगीण विकास हेतु वर्तमान समय की आवश्यकता …