Sunday , 19 September 2021

नई शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की नई राहें खुलेंगी

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि नई शिक्षा नीति-2020 देश के दीर्घकालीन विकास में शिक्षक एवं विद्यार्थियों की भूमिका को नये सिरे से परिभाषित करेगी। उन्होंने कहा कि करीब 34 साल बाद देश को राष्ट्रीयता के विचार का पोषण करने वाली ऐसी शिक्षा नीति मिली है जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की नई राहें खुलेंगी।

राज्यपाल श्री मिश्र भारतीय विश्वविद्यालय महासंघ तथा जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से ‘नई शिक्षा नीति की क्रियान्वयन रणनीति के अन्तर्गत शिक्षक शिक्षा और व्यवसायिक शिक्षा‘ विषय पर आयोजित पश्चिम क्षेत्रीय कुलपति सम्मेलन में आज यहां राजभवन से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केन्द्रित नई शिक्षा नीति में विज्ञान, मानविकी, कला जैसे विषयों के साथ भारतीय विचारधारा से जुड़े अध्ययन का विकल्प प्रदान किया गया है।

राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी शिक्षा नीति में राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान की स्थापना के माध्यम से शोध संस्कृति विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की पहचान भव्य इमारतों से नहीं बल्कि उनकी अध्ययन-अध्यापन और चिंतन परम्परा से बने, इस उद्देश्य से नई शिक्षा नीति में सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने की बात कही गई है।

श्री मिश्र ने कहा कि सूचना एवं संचार क्रांति के इस युग में शिक्षकों को नवीनतम तकनीक से ज्ञान-विज्ञान के प्रसार के लिए भी तत्पर रहना होगा तभी उच्च शिक्षा में विश्वस्तरीय गुणात्मक विकास संभव है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि नई शिक्षा नीति में शिक्षक प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन को पूरा महत्व दिया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों में वर्षों से चले आ रहे पाठ्यक्रम तथा पाठ्यपुस्तकों को बदलते समय के अनुरूप अद्यतन बनाया जाए।

राज्यपाल श्री मिश्र ने भारतीय विश्वविद्यालय महासंघ की ओर से प्रकाशित साप्ताहिक जर्नल ‘यूनिवर्सिटी न्यूज‘ के ‘नई शिक्षा नीति की क्रियान्वयन रणनीति‘ विषय पर आधारित विशेषांक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के आरम्भ में उन्होंने संविधान की उद्देश्यिका तथा मूल कत्र्तव्यों का वाचन भी करवाया।

भारतीय विश्वविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष डाॅ. तेजप्रताप ने कहा कि दो दिवसीय इस वर्चुअल सम्मेलन में व्यवसायिक शिक्षा के बारे में प्रचलित धारणा में बदलाव लाकर इसे मुख्यधारा में जोड़ने तथा व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा देकर सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में वृद्धि, शिक्षकों की क्षमता वृद्धि जैसे विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।

कुलपति सम्मेलन में भारतीय विश्वविद्यालय महासंघ की महासचिव डाॅ. (श्रीमती) पंकज मित्तल, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री संदीप बख्शी सहित अन्य शिक्षाविदों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

समारोह के दौरान राज्यपाल के सचिव श्री सुबीर कुमार, प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्दराम जायसवाल सहित पश्चिमी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं शिक्षाविद् ऑनलाइन उपस्थित थे।

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